सारण के डोरीगंज मे नौ दिवसीय शतचण्डी महायज्ञ का तीसरा दिन,सत्संग मे जुट रही है भीड़ 
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जीवन मे कर्म के साथ आध्यात्म को समाहित करे- गोबिन्द जी महाराज

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#दिग्विजय सिंह बबलू की रिपोर्ट 
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डोरीगंज -:
मानव मूल्यो का दर्शन है भागवत कथा परमपिता परमात्मा की विशेष अनुकंपा से हमें यह मानव जीवन प्राप्त हुआ है। इसका मूल्य क्या है इसकी महता उन्हीं जनमानसों को पता है जो कथा सत्संग में अपने जीवन का कुछ समय अनिवार्य रूप से व्यतीत करते हैं।
उक्त बातें शहर के पूर्वी तेलपा स्थित पार्वती योगाश्रम के समीप चल रहे नौ दिवसीय शतचण्डी महायज्ञ अनुष्ठान के तीसरे दिन गुरूवार को कथा प्रवचन के दौरान वाराण्सी से पधारे कथा प्रवाचक संत श्री गोविन्द जी महाराज ने कही  उन्होने कहा कि यह भागवत रूपी महापुराण महर्षि नारद की प्रेरणा से वेद व्यासजी ने इसीलिए रचित किया ताकि इसका श्रवण कर मनुष्य मोक्ष का मार्ग अपना सके क जीवन में कर्म के साथ ही अध्यात्म को  समाहित कर सकें। कलियुग में कल्याण व भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एक भाव हरि नाम ही है। उन्होंने कहा कि हमें भगवान से भक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं मांगना चाहिए
दूसरी ओर अध्यात्म के साथ योग की महता पर प्रकाश डालते हुए उन्होने कहा कि  कृष्ण एक ऐसा चरित्र है जो जीव के अनंत रूप का एक मात्र केन्द्र है। जीव जिस केन्द्र से आता है उसी केन्द्र बिन्दु में पुनः समाहित हो जाता है। लेकिन इस केन्द्र बिन्दु से आने और जाने की जो आठ सीढ़ियां हैं। वही योग का एक प्रशस्त मार्ग है। योग जब संयोग में बदलता है तो जीवन की आभा किरण प्रस्फुटित होती हैं और जब व्यक्ति जीवन में आनंद प्राप्ति के लिए योग का प्रयोग अपने हृदय में उतारता है इस दौरान कथा पण्डाल मे श्रद्धालुओ की भारी भीड़ देखी गई।