छपरा, 30 जुलाई।
प्रस्तावित बिहारविश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में गुरुवार को राजेन्द्र कॉलेज परिसर में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों द्वारा प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में फुसटाब के प्रदेश उपाध्यक्ष सह एमएलसी प्रो विरेन्द्र नारायण यादव ने भाग लेते हुए शिक्षकों से आह्वान किया कि प्रस्तावित कानून शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय के स्वायत्तता के साथ खिलाफ है। अतः विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों एवं कर्मियों को सजग रहने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि बिहार में विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए बना 50 साल पुराना कानून अब बदलने वाला है।

सरकार आगामी मानसून सत्र में नया विधेयक लाने की तैयारी कर रही थी लेकिन शिक्षकों एवं प्रतिनिधियों के दबाव में तत्काल इसे स्थगित किया गया। इस नए विधेयक के पास होते ही बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। इनकी जगह ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ प्रभावी होगा। इसका प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है।

प्रस्तावित कानून में कॉलेज शिक्षकों के लिए कड़े नियम हो सकते हैं। उनकी सेवा शर्तें सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों जैसी होगी। अगर यह ड्राफ्ट बिना किसी बदलाव के लागू होता है, तो कॉलेज शिक्षकों के चुनाव लड़ने और किसी राजनीतिक दल का सदस्य बनने पर पूरी तरह रोक लग सकती है। इसके अलावा, कॉलेजों के यूनिवर्सिटी से अलग होने पर कॉलेज शिक्षकों के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनने की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

ड्रॉफ्ट में कोई संशोधन नहीं हुआ तो नए कानून के लागू होने के बाद राज्य के सभी विश्वविद्यालय एक ही एक्ट के तहत आ जाएंगे। वर्तमान में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के लिए अलग व्यवस्थाएं हैं। हालांकि, जो विशेष विश्वविद्यालय किसी विशेष उद्देश्य के लिए बने हैं, वे अपने पुराने नियमों से ही संचालित होंगे। लोक भवन ने इस विधेयक का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया है। इस मौके पर प्राचार्य प्रो संजय कुमार उपस्थित थे।

राजेन्द्र कॉलेज में हुए इस प्रदर्शन में एमएलसी प्रो वीरेंद्र नारायण यादव के साथ कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ प्रशांत कुमार सिंह, शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के हरिहर मोहन के साथ कॉलेज के सभी शिक्षक एवं कर्मी शामिल हुए।
Jay Prakash University – JPU, Chhapra