विकास शुन्य फिर किस कारण पांच साल में पांच कार्यपालक पदाधिकारी बदलें….!
सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत के गठन बाद प्रथम आम चुनाव के पांच साल बीतने को चले इन पांच सालों में जहां से नगर पंचायत की शुरूआत हुई वहीं आज भी यह कायम है हलांकि इन पांच सालों में जो सबसे दिलचस्प बात रही वह है नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी का योगदान व तबादला।
इन पांच सालों में पांच कार्यपालक पदाधिकारी का योगदान हुआ और तबादला। शायद यह नगर पंचायत बिहार का इकलौता पंचायत होगा जहा विकास से ज्यादा कार्यपालक पदाधिकारी बदले गये ।
नगर पंचायत के गठन वर्ष 12 में हुआ था। उस समय डीसीएलआर वृन्दलाल को नगर पंचयात का कार्यभार मिला। वृन्दलाल के समय नगर पंचायत में शिक्षक की बहाली भी हुई। उनके बाद नगर विकास विभाग के द्वारा विमल कुमार का पोस्टिंग हुई। विमल कुमार के साथ पार्षदों के द्वारा कार्यालय में बांध कर मारपीट का हाई प्रोफाईल ड्रामा के बाद उन्होंने अपना स्ततांतरण यहां से करा लिया।
कार्यपालक के पद खाली होने के बाद जिला प्रशासन ने लोकल पदाधिकारी को को रूप में कार्य कर रहें अवर निर्वाची पदाधिकारी पवन कुमार को प्रभार मिला। फिर पवन कुमार के साथ नगर अध्यक्ष व वार्ड पार्षदों का खटपट होने का बाद नगर परिषद सहरसा के कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश राम को प्रभार मिला।
दिनेश राम ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विकास कार्य को गति देने का काम किया डस्ट बीन,शेक्सन मशीन,कचरा ट्राली,स्ट्रीट लाईट आदि की खरीद कर जैसे ही विकास को गति देना शुरू किया कि उनका भी तबादला कर विभाग ने रीता कुमारी को यहां पदस्थापित कर दी।
रीता कुमारी का कार्यकाल ठीक ठाक चल रहा था इसी बीच आवास योजना का कार्य चल रहा था कि अचानक रीता कुमारी के खिलाफ विधानसभा में मामला उठाने के बाद विभाग ने उनको पटना बुला लिया। फिर इस पद पर जिलाधिकारी को पदस्थापित करने का निर्देश विभाग के द्वारा मिलने पर एसडीओ सुमन प्रसाद साह को जिलाधिकारी ने प्रभार लेने का निर्देश दिया। जवकि एसडीओ खुद नगर पंचायत का निर्वाची पदाधिकारी है, जिन कारन कार्यपालक पदाधिकारी के प्रभार में नहीं रह सकते, ऐसा राज्य निर्वाचन का निर्देश है। तब उसके बाद सिमरी बख्तियारपुर बीडीओ चंदा कुमारी को प्रभार का निर्देश दिया।





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