सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती की रिपोर्ट :-
आज से छत्तीस वर्ष पूर्व हुए देश की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना से जुड़ी हमेशा से कई चर्चाएं आम रही।उनमें से कुछ महत्वपूर्ण चर्चाएं निम्न है : 
➡ बताया जाता है कि हादसे के बाद बागमती नदी से शव इतनी ज्यादा संख्या में निकले थे कि प्रशासन ने कुछ दिनों के लिए पुल संख्या 51 के आसपास के ग्रामीणों को बागमती के पानी ना पीने की सलाह दी थी।साथ ही ग्रामीणों को उनके पशुओ को भी बागमती की पानी ना पिलाने का सलाह दी गई।
➡छह जून 1981 की संध्या धमारा और बदला के आसपास तूफान का वेग इतना ज्यादा था कि छोटे – छोटे बच्चे को उठा कर एक जगह से दूसरी जगह गिरा देता था.
➡ छह जून 1981 को ट्रेन में यात्रियों की भीड़ ज्यादा होने की मुख्य वजह शादी – बियाह का लग्न जबरदस्त होना था.वही ट्रेन में अधिकतर यात्री शादी – बारात में जा रहे थे या लौट रहे थे.
➡ घटनास्थल के आसपास ग्रामीण बताते है कि घटना के बाद लगभग एक महीने तक हर रोज दिन और रात चिताये जलती रही.
➡ देश की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना के अगले दिन सुबह से ही हेलीकॉप्टरो का पुल संख्या 51 के बगल के खेत में उतरना – उड़ना कई दिनों तक जारी रहा.
➡ ग्रामीण बताते है कि सेना और नेवी द्वारा शवो को खोजने के लिए काफी मशक्कत किया गया.सेना ने पानी के अंदर टाइमर विस्फोट कर शव निकालने की योजना बनाई थी.
➡ रेलवे के लिए 1981 अशुभ वर्ष के रूप में जाना जाता है.उस वर्ष जनवरी से दिसम्बर तक में भारत के विभिन्न हिस्सों में कई रेल दुर्घटनाये हुई थी.उस समय रेल की कमान केदारनाथ पांडे के हाथ में थी.
➡  रेल हादसे के बाद हर गोताखोर को एक लाश निकालने पर कुछ पैसे देने को कहा गया था पर गोतोखोरों ने लाश निकालने के बदले में पैसे लेने से मना कर दिया