डॉ.अशोक चौधरी कांग्रेस में बोझ थे और जदयू में भी बोझ बनकर ही रहेंगे : रामाकान्त

✍🏻कुमार विपेन्द्र
सीवान : “पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. अशोक चौधरी समेत चार विधान पार्षदों द्वारा कॉंग्रेस छोड़कर जदयू में जाने से जद यू को कोई लाभ होनेवाला नहीं है।ये लोग काँग्रेस में बोझ थे।जद यू में भी बोझ बन जायेंगे।डॉ अशोक चौधरी जितने दिनों तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे,काँग्रेस को ह्रास ही हुआ।” उक्त बातें जीरादेई के पूर्व विधान सभा प्रत्याशी रामाकान्त सिंह ने कहीं।श्री सिंह ने कहा कि अशोक चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है।वे कभी कार्यकर्त्ता के रूप में कार्य नहीं किये हैं।काँग्रेस में रहते हुये वे कार्यकर्ताओं से बात करने में अपनी तौहीनी समझते थे। कार्यकर्ताओं का अनादर करना, उन्हें डाँटना तथा उनसे दूरी बनाकर रहने में अपनी शान समझते थे।कांग्रेस में रहते हुए कभी पार्टीहीत एवम् कार्यकर्ताओं के हीत में कार्य नहीं किये।कार्यकर्ताओं पर कभी संकट आने की स्थिति में मुँह मोड़ लेना उनकी आदत-सी रही है।
बिहार की शिक्षामंत्री रहते हुए ,वे सीवान के प्रभारीमंत्री थे।वे कई बार सीवान आये लेकिन एक बार भी वे काँग्रेस कार्यालय नहीं गये और न ही कार्यकर्ताओं से बात किये।भूलवश कोई कार्यकर्त्ता अतिथिगृह में उनसे मिलने चला जाता था,तो बात करने से मना कर देते थे।
पूर्व विधान सभा प्रत्याशी श्री सिंह ने डॉ अशोक चौधरी पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि वे कॉमर्शियल लीडर हैं न कि पब्लिक लीडर।कांग्रेस ने डॉ अशोक चौधरी को क्या नहीं दिया।2000 ई. के आसपास काँग्रेस के सक्रिय राजनीति में वे कदम रखे।बहुत कम समय में काँग्रेस ने उन्हें विधायक बनाया,फिर कारा मंत्री।उन्हें विधान पार्षद बनाया।प्रदेश का अध्यक्ष बनाया।बिहार सरकार में शिक्षामंत्री बनाया।अब बनना क्या चाहते हैं..मुखयमंत्री?कांग्रेस से इतना कुछ मिलने के बाद भी कांग्रेस के साथ धोखा किये।ऐसे स्वार्थी नेता कभी भी किसी दल का हितैषी नहीं हो सकते हैं।जहां भी जायेंगे धोखा ही देंगे और नुकसान ही पहुंचायेंगे।




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