घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं: प्रमोद

छपरा (सारण) भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद सिंह टुन्ना ने कहा कि हजारों मील का पैदल सफर तय कर रहे मजदूरों के उत्पीड़न और परेशानी की खबरों से आहत होकर प्रशासन को चेताते हुए कहा कि पैदल साईकिल से अपनी मंजिल पर जा रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं होगा।

उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान और मजदूर के समक्ष कोरोना के इस संकट के समय तबाही का एक नया दौर आ खड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार न होने के कारण लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश,पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में खेतीहर मजदूर और फैक्ट्रियों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उपेक्षा और गलत नीतियों के चलते आए दिन हजारों श्रमिक पंजाब से चलकर दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद,वाराणसी,गोरखपुर,बलिया के रास्ते गुजर रहे हैं। इन खेतीहर वो फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों पर पुलिस का अत्याचार जारी है। जिसकी खबरें समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं। महामारी के कारण भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूर बच्चों सहित अपने गांव की हजारों किलोमीटर दूरी की पैदल यात्रा पर निकले हैं।

उन्होंने किसानों और भारतीय किसान यूनियन के लोगों से अपील है कि इन प्रवासी श्रमिकों के लिए अपने गांव की सीमा में भोजन पानी एवं छाया या रुकने की उचित व्यवस्था कराएं। प्रवासी श्रमिकों को कैम्प में रोककर पैदल चल रहे लोगों की सूचना प्रशासन को देकर इनके लिए बसों की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें।