
धर्मेंद्र रस्तोगी/छपरा।प्रस्तावित ‘बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 2026’ के खिलाफ राज्य भर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को विभिन्न कॉलेजों में प्राध्यापकों और कर्मियों ने हाथों में काला फीता बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया और सरकार के इस नए प्रस्ताव का विरोध दर्ज कराया।

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राजेन्द्र कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। ‘बिहार विश्वविद्यालय, महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन आगामी 5 सितंबर तक जारी रहेगा। इसी कड़ी में, आगामी 10 अगस्त को विश्वविद्यालय मुख्यालय पर सभी शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों का महाजुटान होगा, जहां इस विधेयक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।
स्वायत्तता पर कुठाराघात का आरोप
गौरतलब है कि सरकार पुराने ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976’ और ‘पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976’ को समाप्त कर एक नया विश्वविद्यालय अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। नए अधिनियम के प्रावधानों को लेकर राज्यभर के विश्वविद्यालयों के कर्मियों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह नया अधिनियम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा कुठाराघात है।
शैक्षणिक कार्य रहे सुचारू
बुधवार को विरोध के बावजूद कॉलेज के शिक्षकों और कर्मियों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मार्ग अपनाया। उन्होंने अपने दैनिक दायित्वों का पूरी तरह से निर्वहन किया। पूर्व की भांति परीक्षा संचालन, स्नातक प्रथम खंड और वोकेशनल विषयों में नामांकन सहित अन्य सभी शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से संचालित किए गए।
इस दौरान विरोध प्रदर्शन में डॉ. अनुपम कुमार सिंह, डॉ. अर्चना उपाध्याय, डॉ. गोपाल साहनी, डॉ. अल्लाउद्दीन, डॉ. रंकेश जायसवाल, डॉ. अब्दुल रशीद, डॉ. सुनील प्रसाद, डॉ. राकेश कुमार सिंह और डॉ. कुमार गौरव समेत कई अन्य शिक्षक और कर्मी उपस्थित रहे।




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