रसुलपुर किसानों को दी गई आधुनिक व प्राकृतिक खेती की जानकारी

दैनिक खोज खबर/सोनपुर। सोनपुर प्रखंड के रसूलपुर पंचायत में बुधवार को कृषि जनकल्याण किसान चौपाल सह खेत बचाओ अभियान का आयोजन किया गया। चौपाल में किसानों को आधुनिक, टिकाऊ, वैज्ञानिक एवं लाभकारी खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, फसल सुरक्षा, उन्नत बीज प्रबंधन और कृषि नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक वनस्पति संरक्षण पदाधिकारी एस. एस. सज्जाद ने कहा कि फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए समय पर पौध संरक्षण उपाय अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित कीटनाशी उपयोग, जैविक नियंत्रण एवं सुरक्षित खेती तकनीक अपनाने की सलाह दी, ताकि फसल उत्पादन बेहतर हो और लागत नियंत्रित रहे।
राज्य स्तरीय कृषि पदाधिकारी मोहन कुमार ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, बीज उपचार, मृदा परीक्षण एवं आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग समय की मांग है। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।
कृषि विशेषज्ञ साक्षी ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति, सूक्ष्म जीवों की सक्रियता और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (टिकाऊ कृषि) के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है।
सोनपुर प्रखंड तकनीकी प्रबंधक कनकलता कुमारी ने बताया कि ATMA (आत्मा योजना) के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रम तथा कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से जल प्रबंधन, खेत संरक्षण, मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
कृषि समन्वयक एवं कृषि विशेषज्ञ रामजीत पंडित ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बहुआयामी लाभ बताते हुए कहा कि इससे रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर खर्च कम, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती, जैविक गतिविधियां सक्रिय होतीं, जल संरक्षण होता तथा फसल की गुणवत्ता एवं पोषण मूल्य में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित कृषि उपज स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती है और यह किसानों के लिए दीर्घकालीन रूप से अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।
सहायक तकनीकी प्रबंधक रवि बाला सोनी ने किसानों को खरीफ फसल प्रबंधन, बीज उपचार, फसल विविधीकरण, पोषक तत्व प्रबंधन एवं मौसम आधारित खेती की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।
इस अवसर पर कृषि समन्वयक कुमार सौरभ, किसान सलाहकार संजीव कुमार, आत्मा सदस्य हरि नारायण सिंह सहित अन्य कृषि कर्मियों ने किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, खेत बचाओ अभियान और जलवायु अनुकूल खेती के बारे में जानकारी दी।इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।