शिक्षानीति में सुधार लाये सरकार: संदीप प्रकाश
कुमार गौरव भागलपुर
तिलकामांझी भागलपुर विस्वविद्यालय के महादेव सिंह महाविद्यालय में अर्थशास्त्र से प्रतिष्ठा की पढाई  कर रहा छात्र संदीप प्रकास उस समय काफी व्यथित हो गया जब उसने एक उसने सरकारी विद्यालय के के कक्षा पंचम  के एक छात्र  निलेस(काल्पनिक नाम) से उसका परिचय के साथ साथ बिहार के मुख्यमंत्री का नाम पूछ लिया । घर आकर उसने बिहार की ढहती  शिक्षा संरचना पर एक आलेख लिखा और उसने *दैनिक खोज खबर*के साथ शेयर किया । हम उन्हीं के कलम से लिखा यह लेख आप पाठकों के साथ सेयर कर रहे हैं—–
बिहार में शिक्षा के तथाकथित ठेकेदारो , शिक्षा का अलख जगाने का दावा करने वाले समाजसेवियों , शिक्षा की प्रतिशतता में बढ़ोतरी का दम्भ भरने वाले नेताओं सबो का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहना चाहता हूँ कि मुझमे ना कुछ लिखने की हिम्मत है , ना बोलने का जज्बा और ना सुनने की आदत । फिर भी आज कुछ कहने की गलती करना चाहता हूँ । मुझे यह भी पता है   की  मेरे इस लेख के बाद कई लोग मुझे पागल कहेंगे कुछ लोग यह भी समझेंगे कि मुझे शायद आगे चुनाव लड़ना है या हो सकता है कुछ लोग मेरा मुँह बंद कराने या मेरी कलम तोड़ने मेरे घर तक भी आ धमके परंतु मुझे उसकी कोई चिंता नहीं ।
                अब मैं बात उन दिनों की करना चाहता हूँ जब बिहार ने पूरी दुनियां को शून्य देने का काम किया, जब बिहार ने देस को प्रथम रास्ट्रपति दिया वह भी ऐसे प्रतिभा के धनी जो दोनों हाथों से लिखा करते थे। जहाँ महाजनपद का प्रारम्भ हुआ , जहाँ माउंटेन मेन दसरथ मांझी का जन्म हुआ , जहाँ स्वामी सहजानंद सरस्वती ,मैथिल कोकिल रससिद्ध कवि विद्यापति , रामधारी सिंह दिनकर रामवृक्ष वेनिपुरी,फणिस्वर नाथ रेणू ,देवकीनन्दन खत्री, महामहोपाध्याय पंडित राम अवतार शर्मा ,नलिन विलोचन शर्मा नागार्जुन आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री चाणक्य रहीम कबीर का जन्म हुआ और वाल्मीकि जैसे प्रकाण्ड विद्वान् को बिहार की भूमी ने उत्पन्न किया  ऐसा गौरवशाली बिहार जिसने महावीर को जन्म दिया बुद्ध को ज्ञान दिया वह बिहार आज अपने शिक्षा की बदहाली पर आठ आठ आँसू भ रहा है। शिक्षा का ऐसा केन्द्र जिसने पूरी दुनियां को ज्ञान देने का कम किया (नालंदा  और विक्रमशिला विस्वविद्यालय)   आज वह भी अपनी बदहाली पर रो रहा है । बिहार के हजारों स्कूल को अपनी जमीन नही है तो इसी संख्या में लगभग भवनहीं विद्यालय मौजूद हैं ।जहाँ सौभाग्य से ये दोनों चीज है भी तो वहाँ प्रयाप्त शिक्षक नही हैं।कही दो शिक्षक पर विद्यालय चलता है तो कही कक्षा एक से लेकर आठ तक की पढाई एक गुरूजी के सहारे चल रही है । साथ हीं सरकार ने एक योजना कुछ वर्ष पूर्व सुरु किया जिसका उद्देश्य गरीब बच्चों को घर से निकालकर स्कूल तक पहुचना हो या साक्षरता दर मो बढ़ाना हो मैं उस ओर नही जाना चाहता बेसक इससे भोजन के लोभ में बच्चे स्कूल आये परंतु उसकी शिक्षा स्तर में क्या वाकई सुधार हुआ ? यह एक प्रश्न चिन्ह है । और जब से यह योजना (मध्यान भोजन योजना MDM) प्रारम्भ हुई जिस विद्यालय में एक शिक्षक थे वो उसी कार्य में लग गए और इधर क्या हुआ होगा सब समझ गए होंगे । वही इसी परिस्थिति में सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है ।भला यह कैसे संभव है? शायद यही कारन रहा होगा कि *प्रोड़िकल साइंस की पढाई कर रूबी राय* प्रदेस की टॉपर बन रही है। मध्यान भोजन (खिचड़ी)भले ही मीनू अलग अलग हो पर बनता तो यही है अक्सर के घोटाले से प्रारम्भ कर लोग *बच्चा राय  परमेश्वर लालकेश्वर* तक बन रहे हैं। 
      एक वक्त था जब पूरा सलेबस सिल्सिलेबर ढंग से होता था पुस्तके समय पर मिलती थी कक्षा समय से होती थी शिक्षक विद्वान हुआ करते थे और जब उच्च कक्षा पास करने के बाद जब देस की सबसे बड़ी परीक्षा UPSC का परिणाम आता था तो उसमे बिहार नंबर वन पर होता था और आज शिक्षक खुद टेट शिक्षक पात्रता परीक्षा में फेल हो रहे है ।शर्म की बात तो तब होती है जब माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक इस सवाल के जबाब में की आप उच्चतर माध्यमिक परीक्षा किन किन विषयों से उत्तीर्ण की है तो उनका जबाब “पता नहीं भूल गए “में आता है।(ABVP के सामाजिक अनुभूती 2016 का सर्वे ) कई गाँव में कई किलोमीटर तक एक प्राथमिक विद्यालय नही है ।आजादी के सात दसक बाद भी हजारों गाव आज भी लालटेन युग में जीने को मजबूर हैं।
             अब थोड़ी बात मैं उच्च शिक्षा की भी करना चाहता हूँ कई विस्वविद्यालय केवल डिग्रियाँ बाटने के लिए बना है तो कई केवल बेचने के लिए और कुछ फर्जी डिग्री देने के लिए मसहूर हो गया है।सोसल साईट पर बिहार के एक प्रतिष्टित विश्वविद्यालय (तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय) के लिए लिखा गया है कि ———–
बर्बाद होने के लिए सिर्फ   प्यार ही है जरुरी नही है आप तिलकामांझी विश्वविद्यालय में भी दाखिला ले सकते है
ऐसा लोग इसलिए कह रहे है कि तीन वर्ष के प्रतिस्ठा का विषय 5 वर्ष में पूरा होता है। उसमे भी कभी प्रमोटेड तो कभी पेंडिंग तो कभी छात्र के बदले छात्रा का प्रवेस पत्र  रिजल्ट हो गया तो पता नही आपके कितने चप्पल घिसेंगे और कितने विश्वविद्यालयी देवता को चढ़ावा चढ़ाना परे। और यही कारण है कि बिहार आज भी इतना पिछड़ा हुआ है।
अब मैं कुछ विशेष नही कहना चाहता हूँ बस सभी पदाधिकारियों नेताओं शिक्षकों  शिक्षाविदों से अपील करता हूँ कि जिस भी तरह हो बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दे और अपने समाज और राज्य को शिक्षित और समृद्ध बनाएं।