संत परमहंस दयाल जी के नाम पर छपरा में विचार केंद्र की स्थापना की मांग संसद में सिग्रीवाल ने उठाया
छपरा : देश-दुनिया को भक्ति व ज्ञान की किरण फैलाने वाले महान संत परमहंस दयाल जी महाराज के जन्मस्थली छपरा में उनके नाम पर विचार केंद्र की स्थापना की मांग संसद तक गूंजी।उक्त विषयक को लेकर महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने मंगलवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सदन में मामला उठाया।श्री सिग्रीवाल ने सरकार से संत परमहंस दयाल जी महाराज के विचार और सिद्धांतों को देशहित में फैलाने के लिये उनके नाम पर विचार केंद्र की स्थापना को अति आवश्यक बताया ।महान संत के संक्षिप्त जीवनी और बोलते हुए कहा कि 1846 में छपरा के दहियावा में जन्मे संत दयाल जी के विचार और कार्य क्षेत्र अपनी अपनी भाषा अपने क्षेत्र एवं अपने मजहबी क्षेत्र से दूर गैर मजहबी क्षेत्र में, जो बर्तमान में पाकिस्तान के खैवर पख्तूनवा के एक छोटा से कस्बे टेरी को चुना था और यहीं पर ज्ञान भक्ति का प्रचार करते हुये 1919 में समाधि ले ली।इनके अनुयायियों द्वारा उनके विचारों को लोगों तक पहुचाने कार्य आज भी कई आश्रमों द्वारा किया जा रहा है।जिसमे मध्यप्रदेश में आनंदपुर,मेरठ के नागंली तथा काशी के गढ़वाघाट में आश्रम स्थापित है।जब महान संत को देश दुनिया पूज रही है तो राष्ट्र के लिये विकाश की किरण फैलाने हेतु उनके जीवनी और विचारों को जनजन तक पहुचाने के लिये विचार केंद्र की अति आवश्यकता है।
ज्ञात हो की इसी माह 09 और 10 जुलाई को छपरा रौजा स्थित ब्रह्म विद्यालय एवं आश्रम में दो दिवसीय परमहंस दयाल स्वामी अद्वैतानंद जी महाराज का समाधि शताब्दी समारोह मनाया गया था।जिसमें देश के कोने कोने से संत और अनुयायी भक्त गण बड़ी संख्या में जूटे थे।जहां पर संत स्वामी सत्यानंद जी महाराज व सैकड़ो संत ,अनुयायी व परम भक्त डॉ बी सिंह के साथ हजारों लोगों ने स्वामी परमहंस दयाल जी महाराज के ननिहाल मांझी नंदपुर से रौजा आश्रम तक 19 किमी की पदयात्रा की और दो दिनों तक अध्यात्म पर ब्याख्यान हुआ।