
यूपी : अस्ताचलगामी सूर्यदेव को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया अर्घ्य, सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ होगा छठ व्रत का समापन
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश वासियों को दी छठ महापर्व की शुभकामनाएं,
- सीतापुर सहित यूपी के सभी चीनी मिल कॉलोनी परिसरों में आयोजित हुआ सायंकालीन छठ महापर्व,
- सीतापुर शहर के विभिन्न पीएसी व गोल्फ ग्राउंड तालाब परिसर में निर्मित छठ घाट पर काफी संख्या में जुटे पुरबिया श्रद्धालु व उनके परिजन,
- भोजपुरी व अवधी भाषा के पारंपरिक छठ लोक गीतों से गुंजायमान रहे छठ घाट,
रिपोर्ट : कमल सिंह सेंगर/रियासत अली सिद्दीकी,
लखनऊ/सीतापुर/रामकोट (यूपी) : भगवान भास्कर व छठी माता की अराधना-उपासना का लोक महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन शनिवार की शाम राजधानी लखनऊ के गोमती नदी के विभिन्न घाटों सहित प्रदेश भर में शनिवार की शाम डूबते हुए भगवान भास्कर को श्रद्धा पूर्वक छठ व्रतियों की ओर से अर्घ्य अर्पित किया गया। इस बीच सुबह के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। इस दौरान उन्होंने सांयकाल कई छठ घाटों पर पहुंचकर छठ व्रतियों को और उनके परिजनों को लोक महापर्व छठ की शुभकामनाएं भी दी।
इसी क्रम में सीतापुर शहर मुख्यालय के विभिन्न स्थानों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा- अर्चना कर छठ व्रतियों की ओर से अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया गया। छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं के घरों में शनिवार की सुबह से ही काफी उत्साह एवं उमंग का वातावरण शुरू हो गया। पूजन सामग्री में शामिल होने वाले पारंपरिक पकवानों को शुद्ध देशी घी में तैयार कर उसे बांस के बने डाला में रखा गया। दोपहर बाद छठ व्रतियों के परिजन अर्घ्य सामग्री को सिर के ऊपर रखकर नंगे पांव छठ घाटों पर पहुंचे। छठ व्रती महिलाएं भी “कांच हीं बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाये…..।” आदि पारंपरिक छठ गीतों को गुनगुनाते हुए छठ घाटों तक पहुंची।
शहर के 27 वीं वाहिनी पीएससी गोल्फ ग्राउंड स्थित तालाब किनारे पूर्वांचल के लोगों का जनसैलाब देखने को मिला। इसी क्रम में पीएससी द्वितीय बटालियन के कॉलोनी परिसर निर्मित कृत्रिम जलाशय के अलावा सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी कृत्रिम छठ घाट पर रंजु तिवारी, रुचि, ब्यूटी, मिंटू किस्मति आदि ने छठ व्रतियों ने छठ व्रत का सांयकालीन अनुष्ठान पूरा किया।
इसी प्रकार 11 बटालियन व सरायन नदी के किनारे स्थित ताड़कनाथ मंदिर परिसर में छठ घाट पर जवाहरपुर चीनी मिलकर्मियों के परिजन पूनम सिंह, मिंटू सिंह, ब्यूटी, रुचि, नीलम श्रीवास्तव, किरण श्रीवास्तव आदि एवं अन्य सरकारी गैर सरकारी स्टाफ पुरबिया कर्मियों के परिजनों ने सायंकालीन छठ पूजा का अनुष्ठान पूरा किया।
यहां सहयोगी के रुप में महेश प्रसाद सिंह, अजय प्रताप सिंह, रुचि सिंह, अभिमन्यु सिंह, प्रभात श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
उधर घुड़ामऊ बंगला स्थित एक पूरबिया विश्वकर्मा परिवार के आवास परिसर में तैयार किए गए छठ घाट पर श्रद्धालु छठ पूजा में शामिल हुए। रेलवे कालोनी, खूबपुर, तरीनपुर, शास्त्री नगर तपोधाम आश्रम परिसर में बिंदु सिंह बघेल, राहुल सिंह, आर्य नगर, आदर्श नगर आदि मोहल्लों के अलावा रामकोट, जवाहरपुर, रामगढ़, हरगांव, महोली, बिसवां, महमूदाबाद चीनी मिल कालोनियों व आसपास के क्षेत्रों में रह रहे बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के निवासियों व उनके परिजनों की ओर से शनिवार की शाम पारंपरिक तरीके से अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया गया।
उधर रामकोट संवाददाता के अनुसार स्थानीय गंगासागर तीर्थ परिसर के अलावा जवाहरपुर स्थित डालमिया चीनी मिल कॉलनी परिसर में निर्मित कृत्रिम छठ घाट के किनारे चीनी मिल कर्मियों के परिजनों की ओर से शनिवार की शाम चार दिवसीय छठ व्रत के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को श्रद्धा व आस्था के साथ अर्घ्य सामग्री अर्पित की गई।
यहां बिंदुलता उपाध्याय, प्रियंका उपाध्याय, पल्लवी उपाध्याय, गुड़िया, निर्मला, नंदनी, सीमा, अमिता, शांति यादव, फूलमती यादव, ममता, बिंदु,आदि छठ व्रतियों की ओर से छठ व्रत किया गया। महिला क्लब की अध्यक्ष रमा सिंह ने छठ व्रती महिलाओं को छठ में हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया।
दौरान चीनी मिल के सहायक अधिशासी निदेशक टीएन सिंह की ओर से छठ आयोजन स्थल पर पहुंचकर छठ व्रतियों एवं उनके परिजनों को छठ पूजा की शुभकामनाएं दी गई।
बुजुर्गो को सम्मान देने की सिख देता है छठ : टीएन सिंह
इस मौके पर जवाहरपुर चीनी मिल कॉलोनी परिसर स्थित कृत्रिम छठ घाट पर यूनिट हेड टीएन सिंह ने कहा कि सांय कालीन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देना हमें बुजुर्गों का सम्मान दिलाना सिखाता है। उन्होंने कहा कि जो परोपकारी व कल्याणकारी हो उसको जीवन के अंतिम समय में भी सम्मान दिया जाना चाहिए। आज के समय में लोग अपने बुढ़े माता-पिता एवं उपकारी लोगों की उपेक्षा करते हैं। उन्हें भी यह छठ व्रत नसीहत देता है कि ऐसे लोगों को जीवन के अंतिम समय में भी उचित आदर सम्मान देना चाहिए।
छठ व्रतियों ने कोसी भरने की परंपरा का निर्वहन भी किया :
छठ पूजा के तीसरे दिन छठ घाट से लौटने के बाद घरों में भी कोशी भरने की पारंपरिक रस्म का निर्वहन किया। गन्ने के बनाए घरौंदे के बीच मिट्टी के हाथी के ऊपर चौमुखा दीपक जलाकर पारंपरिक पकवान व मौसमी फलों को छठी माता को अर्पण करके पारंपरिक छठ गीतों का गायन किया।




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