शाम ढ़लते ही शुरू हो जाती चुनावी सरगर्मी
रविकांत कुमार की विशेष रिपोर्ट दैनिक खोज खबर मुरलीगंज,मधेपुरा
शाम को जैसे ही सूर्य की तापमान ढलती जाती है , ठीक उसी प्रकार मुरलीगंज नगर निकाय में चुनावी सरगर्मी बढ़ती जाती है। यहां दिन भर न ज्यादा चुनावी शोरशराबा और न ही चुनावी हलचल देखने को मिलता है । जब दिन ढलने लगता है तब चुनावी शोरशराबा और उम्मीदवारों एवं उनके समर्थको की हलचल तेज़ हो जाती है।
सभी वार्डो के प्रत्याशी अपने अपने वार्डो के मतदाताओं को लुभाने में कमरतोड़ मेहनत करने में लगे हुये है , लेकिन इस बार मुरलीगंज की जनता ने भी अपनी कमर कस ली है और अपना अपना प्रतिनिधि मन ही मन चुन लिया है। ऐसा बताया जाता है कि जनता अब परिवर्तन चाह रही है और परिवर्तन के लिए अपना अपना विकल्प भी ढूंढ रही है कि किसको चुने जो हमारी सुनेगा और नगर पंचायत की विकास करेगा।
चाय की दुकान पर एक 65 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि चुनाव के समय मे सब एक जैसे लगते है , सब विकास की बात करते है, समझ मे नही आता कि किसको चूने अपना प्रतिनिधि। नगर पंचायत में हुये विकास और निवर्तमान पार्षदों के बारे में उन्हीने व्यंग करते हुऐ कहा कि विकास तो काफी हुआ है , नगर पंचायत
बन गए है नरक पंचायत ।
सामने सहर के मुख्य चौक सिनेमा चौक के चौराहे पर कई महीनों से जमे गंदे पानी की ओर इशारा करते हुवे कहा,आपके सामने विकास की गंगा बह रही है देखकर आप खुद अन्दाज़ा लगा सकते है। वही बगल में बैठे एक युवक ने बताया कि जल जमाव की समस्या यहाँ ही नही बल्कि पूरे नगर पंचायत के विभिन्न वार्डो में है । सडको पर नाले का गंदा पानी जमा रहता है आसपास के दुकानदारों और आम लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत के द्वारा किये गए विकास की योजनाएं ज्यादातर कागजो पर ही सिमट कर राह गयी। चाहे शौचालय निर्माण की बात हो या नाले निर्माण की या फिर डोर टू डोर स्वक्षता अभियान की ज्यादातर योजनाएं धरातल पर सफल नही हो पाई। वही मुरलीगंज झिलचौक निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि विकास तो हुआ है लेकिन जितना होना चाहिए उतना तो नही हुआ है । इस बार जनता ने सब को मौका दिया है अब नए चेहरे की तलाश में है। निवर्तमान पार्षद की अगर बात करे तो ऐसा माना जा रहा है कि कुछ को छोड़कर बांकी की कुर्शी बचा पाना मुश्किल होगी। और उन्होंने नगर की अहम समस्या टेम्पू स्टैंड और बस पड़ाव को बताया । अब तक बस पड़ाव व्यवस्थित नही हो पाई है और न ही टेम्पू के लिए निर्धारित स्टैंड की व्यवस्था की पहल की गई है। जिस कारण टेम्पू सडको पर यात्र तत्र खड़ी करती है जिसके कारण आम लोगो को काफी परेशानियो का सामना करना पर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार प्रत्यासियो के पास कोई नया एजेंडा भी नही देखने को मिल रही है , वही पुरानी एजेंडा आवास योजना, पेंशन योजना , एपीएल, बीपीएल आदि ही है। हालांकि स्थानीय नगर निकाय की चुनाव में मतदाता खुल के सामने नही आते है लेकिन कुछ ऐसे भी मतदाता होते है जिन्हें किसी से कुछ लेना देना नही होता है और वो अपना प्रतिनिधि खुल कर चुनते है। इस बार युवाओ और महिलाओ में खास चुनावी उत्साह देखने को मिल रहे है। नगर पंचायत की सरकार बदलती है या नही , कौन पार्षद जीतता है और कौन हारता है। ये सभी सवालों के जबाब आपको चुनाव परिणाम आने के बाद पता चल ही जायेगा। अभी तो सभी समर्थक अपनी अपनी उम्मीदवार की जीत के दावे कर रहे है । और प्रत्याशी भी अपनी अपनी जीत सुनिश्चित के दावे कर रहे है।




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