कार्यक्रम में शामिल गणमान्य लोग

छपरा: जिला उर्दू भाषा कोषांग के तत्वावधान में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘एक शाम शाद अजीमाबादी के नाम’ विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में उर्दू के मशहूर शायर शाद अजीमाबादी के जीवन, दर्शन और उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान पर विद्वानों ने विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के संयोजक सह उप निर्वाचन पदाधिकारी जावेद इकबाल ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि शाद अज़ीमाबादी केवल एक शायर नहीं, बल्कि उर्दू साहित्य की सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संरक्षक थे। उनकी शायरी में वैचारिक गहराई, मानवीय भावनाएं और सांस्कृतिक चेतना स्पष्ट रूप से झलकती है। उन्होंने शाद की प्रसिद्ध पुस्तक ‘फिक्र-ए-बलीग’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शोधकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल धरोहर है। उनकी साहित्यिक विरासत पर गंभीर शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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राजेंद्र कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अलाउद्दीन खान ने कहा कि शाद की पुस्तक ‘तजकिरा-ए-बलीग’ उर्दू अदब की एक अनूठी कृति है, जिसमें मरसिया (शोकगीत) लेखकों और उनकी साहित्यिक सेवाओं का सुंदर संकलन मिलता है। वहीं, जिला स्कूल के प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद वलीउल्लाह कादरी ने बताया कि शाद ने नात गोई के क्षेत्र में उत्कृष्ट रचनाएं पेश कीं। उनके दौर में सारण के अन्य शायरों ने भी अपनी साहित्यिक सेवाओं से साहित्य जगत को काफी आकर्षित किया था।

काव्य गोष्ठी में गूंजे विविध भाषाओं के कलाम

समारोह के दूसरे सत्र में एक शानदार काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान शकील अनवर, जुनैद मीर, अमीन अंजुम, सुहैल हाशमी, दक्ष निरंजन शंभू, अब्दुस्समद भयंकर, बैतुल्लाह बैत, ऐनुल बरौलवी, शिशिर कुमार और सैयद अफरोज ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने उर्दू, हिंदी और भोजपुरी में एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस सफल आयोजन में मोहम्मद हारून रशीद, मोहम्मद तारिक, कमर आलम, शफारत हुसैन, बबलू भाई और वसीम अकरम राजा सहित कई गणमान्य लोग और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।