माँ अम्बिका भवानी के कोतवाल हैं, अवधूत बाबा गंगा राम
⏭आमी की सीमा ईशुपुर में स्थित औघड़बाबा की पिंडी दर्शन से फलवती होती है,साधना
✍परमार आखिलेश
⏭दिघवारा(सारण)
सर्वेश्वरी महाशक्ति माँ के तंत्र सिद्ध व मंत्रसिद्ध विद्यमान हैं सीमा पर अवधूत बाबा गंगा राम व योगा बाबा। जिनके दर्शन पूजन से प्रसन्न होती हैं, भवानी। बहरहाल,माँ के दोनों अ
राधी की समाधि पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है ।
कौन थे औघड़बाबा?:-आमी व मानूपुर गाँव की सीमा पर एक तालाब है । एनएच 19 से करीब 5000मीटर दक्षिण औघड़बाबा की पिंडी है,जो माई के कोतवाल के रूप में मूर्धन्य हैं।जनुश्रुतियों के अनुसार वाक् सिद्ध अघोड़ी बाबा गंगा राम ने भगवती पर ही वशीकरण का प्रयोग कर माँ को अपने साथ लेख जाना चाहते थे।
योगा बाबा :-योगा बाबा भवानी के वैष्णवी शक्ति उपासक थे व आमी से उत्तर हराजी गाँव के वैदिक ब्राह्मण थे। प्रातः गंगा स्नान व मंदिर की सफाई फिर पूजा अर्चना उनकी दिनचर्या थी। योगा बाबा के इष्ट काल भैरव थे। 
तंत्र-मंत्र संग्राम व शास्त्रार्थ:- ग्रामीणों के अनुसार औघड़बाबा गंगा राम अपने शिष्यों सहित दण्डकारण्य क्षेत्र बक्सर में थे।भँवर अंबिका की शक्ति की प्राप्त अनुभूति से प्रेरित बाबा एक पीपल के बृक्ष पर आसीन हो कर मंदिर के दक्षिण गंगा घाट पर आ गए। बहुत दिनों से वह पीपल का पेड़  साक्षी रहा है । अघोडी गंगा राम ने दर्शनोपरान्त भगवती पर उन्हीं की शक्ति का प्रयोग कर साथ ले जाने का हठ कर बैठे। इधर योगा बाबा को उनके इष्टदेव ने गंगा राम के हठ की जानकारी दी। बहरहाल,योगाबाबा हराजी से आमी मंदिर के लिए चल पडे।
तंत्र-मंत्र संघर्ष व शास्त्रार्थ:-मंदिर के पूजारी प्रेम कुमार तिवारी ठंडा मनन तिवारी मुख्यपंडा पंडित कामेश्वरतिवारी उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया जी महाराज के अनुसार औघड़बाबा गंगा राम ने मंदिर के प्रवेश द्वार को अभिमंत्रित कर दिया था,योगा बाबा जब पाँव बढ़ाना चाहे तो अग्नि शिखाएं निकल पड़ी । योगा बाबा ने निष्किलन कर अग्नि प्रभाव को निष्क्रिय कर मंदिर के गर्भगृह की ओर बढे। दोनों संतों का सामना हुआ । मंत्र-तंत्र प्रहार के बाद शास्तार्थ हुआ ।चूँकि अघोडी बाबा के पीठ पीछे भगवती की पिंडी थी और योगा बाबा सामने पश्चिमाभिमुख होकर उत्तर देने लगे।काल समाप्ति के अनिर्णय की स्थिति में औघड़ ने शाप दिया कि आपके वंश में कोई विद्वान पैदा न  होगा । योगा बाबा ने भी शाप दिया कि आमी सीमा पार करते ही रक्त बमन कर आप शरीर छोड़ देंगे । दोनों संतों का शाप फलीभूत हुआ । जहाँ गंगा राम बाबा रक्त बमन कर कपालखप्पड में प्रवेश किए वहाँ मंदिर है।योगा बाबा की पिंडी ब्रह्म स्थान है, जहाँ भगवती के दोनों भक्त पूजे जाते हैं । योगा बाबा के दसवीं पीढ़ी में पंडित देवी नाथ त्रिपाठी की शिक्षा-दीक्षा किसी विद्वान सम्बन्धी के यहाँ हुई । उन्हीं के कुल में आचार्य गोपाल जी त्रिपाठी दिनेश त्रिपाठी और निलेश त्रिपाठी हैं । इनके अनुसार योगाबाबा की लाठी विरासत में है जिसकी पूजा हमारे कुल में होती है । कालभैरव हमारे कुलदेवता हैं । ईशुपुर में औघड़ेश्वर बाबा गंगा राम की पूजा विधिवत आरती में प्रोफेसर त्रिभुवन प्रसाद यादव,कामेश्वर राय सुमनसिंह आदि सक्रिय रहते हैं । मन्नत पूर्ण होने परमार’का श्रद्धालु मछली रोटी प्रसाद अर्पित करते है औघड़ेश्वर को