बिहार में सिर्फ जाति पर वोट नहीं देते लोग, नरेंद्र मोदी की जाति का कोई भी नहीं, फिर भी उन्हें मिल रहा वोट: प्रशांत किशोर


एकमा (सारण)। सोमवार की सुबह जन सुराज पदयात्रा के 163वें दिन की शुरुआत एकमा प्रखंड के फुचटी कला पंचायत में स्थित मनरानी अनिरुद्ध नारायण हाई स्कूल के परिसर में सर्वधर्म प्रार्थना सभा के साथ हुई। इसके बाद प्रशांत किशोर सैकड़ों पदयात्रियों के साथ फुचटी कला पंचायत से अगले पड़ाव हेतु पदयात्रा के लिए निकले।
सोमवार को जन सुराज पदयात्रा एकमा प्रखंड के कटेया, परसा पूर्वी, परसा दक्षिणी आदि होते हुए एकमा प्रखंड के हुस्सेपुर पंचायत के पुराना ब्लॉक मैदान में जन सुराज पदयात्रा शिविर में रात्रि विश्राम के लिए दोपहर बाद पहुंची।

उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर की पदयात्रा का सारण जिले में सोमवार को दूसरा दिन रहा है। इस दौरान पीके सारण के अलग-अलग गांवों में पदयात्रा के माध्यम से जनता के बीच जाएंगे। जिसमें लोगों की समस्याओं को समझ कर उसका संकलन कर उसके समाधान के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करेंगे। दिन भर की पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने 5 आम सभाओं को संबोधित किया। जिसमें 5 पंचायत के 9 गांवों से गुजरते हुए लगभग 16.2 किमी की पदयात्रा तय की।

बिहार में सिर्फ जाति पर वोट नहीं देते लोग, नरेंद्र मोदी की जाति का कोई भी नहीं, फिर भी उन्हें वोट मिल रहा: प्रशांत किशो

जन सुराज पदयात्रा के दौरान लहलादपुर प्रखंड में पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जाति चुनाव में एक तथ्य है और चुनाव में केवल वोट जाति पर नहीं पड़ते हैं। बिहार में 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं और वो लोग जाति के नाम पर वोट नहीं देते हैं। वह आरजेडी को इसलिए वोट करते हैं, क्योंकि भाजपा के सामने उनको केवल एक ही विकल्प दिखाई देता है। समाज का एक बड़ा वर्ग है, जो जाति पर वोट नहीं करता है। बल्कि वह भाजपा को इसलिए वोट करता है। क्योंकि वो आरजेडी को वोट नहीं करना चाहते हैं। जाति चुनाव में एक पहलू है। लेकिन एक मात्र पहलू नहीं है। जाति यदि एक मात्र पहलू होती तो भाजपा और नरेंद्र मोदी को बिहार में जो वोट मिल रहा है, वह वोट नहीं मिल रहा होता। क्योकि नरेंद्र मोदी की जाति के लोग यहां नहीं हैं। लेकिन मोदी को वोट दूसरे कारणों से मिल रहा है। उनको राष्ट्रवाद के नाम पर, हिंदुत्व के नाम पर, भारत-पाकिस्तान के नाम पर वोट मिल रहा है। ये कहना कि वोट जाति के नाम पर मिल रही है, तो यह एकदम गलत है।

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बिहार में सिर्फ जाति पर वोट नहीं देते लोग, नरेंद्र मोदी की जाति का कोई भी नहीं, फिर भी उन्हें मिल रहा वोट: प्रशांत किशोर

संवाददाता
एकमा (सारण)। सोमवार की सुबह जन सुराज पदयात्रा के 163वें दिन की शुरुआत एकमा प्रखंड के फुचटी कला पंचायत में स्थित मनरानी अनिरुद्ध नारायण हाई स्कूल के परिसर में सर्वधर्म प्रार्थना सभा के साथ हुई। इसके बाद प्रशांत किशोर सैकड़ों पदयात्रियों के साथ फुचटी कला पंचायत से अगले पड़ाव हेतु पदयात्रा के लिए निकले।
सोमवार को जन सुराज पदयात्रा एकमा प्रखंड के कटेया, परसा पूर्वी, परसा दक्षिणी आदि होते हुए एकमा प्रखंड के हुस्सेपुर पंचायत के पुराना ब्लॉक मैदान में जन सुराज पदयात्रा शिविर में रात्रि विश्राम के लिए दोपहर बाद पहुंची।

उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर की पदयात्रा का सारण जिले में सोमवार को दूसरा दिन रहा है। इस दौरान पीके सारण के अलग-अलग गांवों में पदयात्रा के माध्यम से जनता के बीच जाएंगे। जिसमें लोगों की समस्याओं को समझ कर उसका संकलन कर उसके समाधान के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करेंगे। दिन भर की पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने 5 आम सभाओं को संबोधित किया। जिसमें 5 पंचायत के 9 गांवों से गुजरते हुए लगभग 16.2 किमी की पदयात्रा तय की।

बिहार में सिर्फ जाति पर वोट नहीं देते लोग, नरेंद्र मोदी की जाति का कोई भी नहीं, फिर भी उन्हें वोट मिल रहा: प्रशांत किशोर

जन सुराज पदयात्रा के दौरान लहलादपुर प्रखंड में पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जाति चुनाव में एक तथ्य है और चुनाव में केवल वोट जाति पर नहीं पड़ते हैं। बिहार में 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं और वो लोग जाति के नाम पर वोट नहीं देते हैं। वह आरजेडी को इसलिए वोट करते हैं, क्योंकि भाजपा के सामने उनको केवल एक ही विकल्प दिखाई देता है। समाज का एक बड़ा वर्ग है, जो जाति पर वोट नहीं करता है। बल्कि वह भाजपा को इसलिए वोट करता है। क्योंकि वो आरजेडी को वोट नहीं करना चाहते हैं। जाति चुनाव में एक पहलू है। लेकिन एक मात्र पहलू नहीं है। जाति यदि एक मात्र पहलू होती तो भाजपा और नरेंद्र मोदी को बिहार में जो वोट मिल रहा है, वह वोट नहीं मिल रहा होता। क्योकि नरेंद्र मोदी की जाति के लोग यहां नहीं हैं। लेकिन मोदी को वोट दूसरे कारणों से मिल रहा है। उनको राष्ट्रवाद के नाम पर, हिंदुत्व के नाम पर, भारत-पाकिस्तान के नाम पर वोट मिल रहा है। ये कहना कि वोट जाति के नाम पर मिल रही है, तो यह एकदम गलत है।

बिहार के लोगों को पढ़ाई, कमाई व दवाई के लिए मजबूरी में बिहार से बाहर जाना पड़ता है: प्रशांत किशोर

एकमा। जन सुराज पदयात्रा के दौरान सारण के एकमा प्रखंड के फुचटी कला पंचायत के लगुनी गांव स्थित एक निजी स्कूल के परिसर में सोमवार की सुबह में मीडिया संवाद के दौरान बिहार से पलायन की विकरालता को बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अभी तक 1500 से ज्यादा गांव में घूमने के बाद यह सामने आया है की गांवों में 40 से 50 प्रतिशत युवा किसी रोजगार या मजदूरी के लिए घर छोड़कर बाहर गए हैं। बिहार के युवा साल में 10 से 15 दिन के लिए एक बार अपने घर आते हैं और घर की महिलाओं ने ये मान लिया है कि उनके परिवार के पुरुष उनके साथ 15 दिन से ज्यादा नहीं रहेंगे। बिहार में परिवार के साथ रहने का चलन धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। बच्चे पहले पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं, फिर कमाई यानि रोजगार के लिए बाहर जाते हैं और थोड़ी उम्र होने के बाद फिर इलाज और दवाई के लिए बाहर जाते हैं। परिवार का एक साथ न रहना एक बहुत बड़ी सामाजिक त्रासदी है, जो आज बड़े स्तर पर देखने को मिल रही है।

बिहार में ग्रामीण सड़कों की स्थिति लालू जी के जंगलराज जैसी ही है: प्रशांत

प्रशांत किशोर ने सारण के एकमा इलाके में अपने मीडिया संवाद के दौरान राज्य सरकार की सात निश्चय की बड़ी योजनाओं पर हमला करते हुए कहा कि बिजली को लेकर जो नई समस्या लोगों को आ रही है। वह बिजली के बिल में गड़बड़ी है। इसमें गलत और बढ़े हुए बिल आ रहे हैं। जिन लोगों से मेरी मुलाकात हुई है, उन्होंने 2 हजार से लेकर एक लाख 25 हजार तक के बिल दिखाए हैं। ज़्यादतर लोगों का कहना है कि उनका बिल गलत है और एक बार गलत बिल आ जाता है तो उनकी बिजली कनेक्शन काट दी जाती है। उन्होंने सड़क की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय और राज्य हाइवे की बात छोड़ दें, तो ग्रामीण सड़कों की स्थिति, जो ग्रामीण कार्य विभाग या पंचायती राज के अंतर्गत आती हैं, उन सड़कों की स्थिति आज भी वही है जो लालू जी के जंगलराज के समय में थी।
इस अवसर पर पीके के मीडिया टीम के संदीप कश्यप, पुरुषोत्तम शर्मा आदि के अलावा क्षेत्रीय जन सुराज पदयात्रा में शामिल समाजसेवी व गणमान्य लोग मौजूद थे।

एकमा। जन सुराज पदयात्रा के दौरान सारण के एकमा प्रखंड के फुचटी कला पंचायत के लगुनी गांव स्थित एक निजी स्कूल के परिसर में सोमवार की सुबह में मीडिया संवाद के दौरान बिहार से पलायन की विकरालता को बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अभी तक 1500 से ज्यादा गांव में घूमने के बाद यह सामने आया है की गांवों में 40 से 50 प्रतिशत युवा किसी रोजगार या मजदूरी के लिए घर छोड़कर बाहर गए हैं। बिहार के युवा साल में 10 से 15 दिन के लिए एक बार अपने घर आते हैं और घर की महिलाओं ने ये मान लिया है कि उनके परिवार के पुरुष उनके साथ 15 दिन से ज्यादा नहीं रहेंगे। बिहार में परिवार के साथ रहने का चलन धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। बच्चे पहले पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं, फिर कमाई यानि रोजगार के लिए बाहर जाते हैं और थोड़ी उम्र होने के बाद फिर इलाज और दवाई के लिए बाहर जाते हैं। परिवार का एक साथ न रहना एक बहुत बड़ी सामाजिक त्रासदी है, जो आज बड़े स्तर पर देखने को मिल रही है।

बिहार में ग्रामीण सड़कों की स्थिति लालू जी के जंगलराज जैसी ही है: प्रशांत

प्रशांत किशोर ने सारण के एकमा इलाके में अपने मीडिया संवाद के दौरान राज्य सरकार की सात निश्चय की बड़ी योजनाओं पर हमला करते हुए कहा कि बिजली को लेकर जो नई समस्या लोगों को आ रही है। वह बिजली के बिल में गड़बड़ी है। इसमें गलत और बढ़े हुए बिल आ रहे हैं। जिन लोगों से मेरी मुलाकात हुई है, उन्होंने 2 हजार से लेकर एक लाख 25 हजार तक के बिल दिखाए हैं। ज़्यादतर लोगों का कहना है कि उनका बिल गलत है और एक बार गलत बिल आ जाता है तो उनकी बिजली कनेक्शन काट दी जाती है। उन्होंने सड़क की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय और राज्य हाइवे की बात छोड़ दें, तो ग्रामीण सड़कों की स्थिति, जो ग्रामीण कार्य विभाग या पंचायती राज के अंतर्गत आती हैं, उन सड़कों की स्थिति आज भी वही है जो लालू जी के जंगलराज के समय में थी।
इस अवसर पर पीके के मीडिया टीम के संदीप कश्यप, पुरुषोत्तम शर्मा आदि के अलावा क्षेत्रीय जन सुराज पदयात्रा में शामिल समाजसेवी व गणमान्य लोग मौजूद थे।