पप्पू मियां व जमालुद्दीन बनाते है 55 फीट का रावण, विजयादशमी को सलिमापुर मेंं होता है रावण दहन

मढ़ौरा(सारण): प्रखंड के सलिमापुर में रावण दहन की 27 वर्षो की परम्परा की तैयारियां जोरों पर हैं.विजयादशमी पर शाम 8 बजे गांव के ही पप्पू मियां , जमालुद्दीन , सुखल सिंह, राजेश सिंह और संजय बैठा द्वारा बनाए गए रावण और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले राम के छोड़े बाणों से जलेंगे.

सलिमापुर गांव के पोखर पर पुतला निर्माण का अस्सी फीसदी काम पूरा हो चुका है.रावण के पुतले की लंबाई 55 फीट औऱ कुंभकर्ण के पुतले की लंबाई 50 फीट का होगा.पप्पू मियां और जमालुद्दीन अपने आधा दर्जन गांव के ही सहयोगियों के साथ निर्माण में जुटे हैं।ज्ञात हो की पिछले 27 वर्षो से स्थानीय दुर्गा पूजा समिति द्वारा पूजा के साथ ही विजयादशमी पर रावण दहन का भी कार्यक्रम होते आ रहा है.

पूजा समिति के अध्यक्ष डॉ. मनींद्र कुमार सिंह नें बाताया की विगत 27 वर्षो से दुर्गापूजा के साथ ही रावण दहन का कार्यक्रम होते आ रहा है.जिसमें रावण व कुम्भकर्ण का पुतला शौकिया तौर पर गांव के ही युवक बनाते आ रहे है.गांव के इन युवकों का मानना है की पुतला बनाने की कला उन्हें विरासत में मिली है.उन्होंने यह कला अपने से सीखी है.बताया कि इस काम में फायदा नहीं है पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतलों को जलता देख उन्हें बहुत खुशी होती है.निर्माण कर रहे ग्रामीणों के अनुसार बांस को काटकर उन्हें पुतलों की आकृति में ढाला जाता है.उस आकृति पर पेपर लगाकर पेंट किया जाता है.पुतलों को बनाने में बांस, पेपर, सूती सुतली और कपड़ा लग रहा है.फ्लैक्स के जरिये रावण के दसों सिर और आंख की आकृति बनायी जाती है.लगभग 300 पटाखे इन पुतलों में भरे जाते है.रावण दहन के पहले और बाद में भी दर्शकों को शानदार आतिशबाजी देखने को मिलती है.विशेषज्ञ कारीगरों द्वारा पटाखा लगाने का काम किया जाता है.रावण दहन के दिन काफी भीड़ रहती है.जिसमेंं दूरदराज से सीमावर्ती प्रखंड बनियापुर, नगरा और इसुआपुर के भी कई गांवो के लोग जुटते है. जिसकों नियंत्रित करने के लिये पूजा समिति के लोगों के साथ पुलिस प्रशासन भी समन्वय बनाकर कार्यक्रम को शांति पूर्वक सम्पन्न कराता है.




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