
नमाजियों ने चिलचिलाती धूप में नमाज अदा कर मांगी अमन चैन की दुआ
मशरक(सारण) : रमजान का पाक महीना हर मुसलमानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व होता है.इसे लेकर रमजान के दूसरे जुमे को मशरक के थाना रोड स्थित मस्जिद एवं बहरौली स्थित जामे मस्जिद में 17 मई को चिलचिलाती धूप में अकीदत के साथ नमाज अदा की गई.जुमे के दिन नमाज अदा करने के लिए हर तरफ रोजेदार व गैर रोजेदार मस्जिदों की ओर बढ़ रहे थे. मस्जिदों में जिसे जहां जगह मिली,वें वहीं बैठ गये.इस दौरान नमाजियों की भीड़ से मस्जिदों का आंगन छोटा पड़ने लगा.तो चिलचिलाती धूप में मस्जिद के बरामदें पर नमाजियों ने नमाज अदा की.नमाज के दौरान जामे मस्जिद के इमाम मौलाना मो.साहेब हुसैन की तकरीरों में लोगों को नसीहत दी गई.मौलाना ने कहा कि यह महीना पूरी शिद्दत से खुदा के लिए समर्पित होता है.इसमें मांगी गयी दुआएं अल्लाह जरुर पूरी करते हैं.इसमें रोजेदार जितना हो सकता है.उसमें कहीं ज्यादा बार कुरान शरीफ पढ़ते हुए खुदा के इबादत में लीन रहते हैं.उन्होंने रोजेदारों से शरीर साफ रखने के साथ ही घर और बाहर की सफाई रखने का भी सलाह दिया.साथ ही कहा कि हर रोजेदार को भूखा रहकर आंख, कान, पेड़, हाथ व जूवान से रोजा रखाना जरुरी नहीं,बल्कि गरीबों आैर जरुरतमंदो की मदद करना भी एक रोजेदार का फर्ज होता है.रोजा का मकसद गरीबों की मदद करना साथ ही उसके दुख दर्द को महसूस करना.हर तरह की बुराइयों आैर पाखंडो से दूर करना.रोजा का अर्थ सिर्फ भूखा रहना ही नहीं है.बल्कि भूखे रहने के साथ मन को भी पवित्र रखना भी रोजा है.आंख से किसी भी तरह के गलत काम को नहीं देखना,कान से कोई गलत बात नहीं सुनना आैर मुंह से कोई गलत बात नहीं करना ही रोजा कहलाता है.उन्होंने कहा कि रमजान एक मुसलमान को ईमान आैर नेकी के साथ पूरी जिंदगी बसर करने की राह दिखाता है.




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