त्रिपुरा की जनता ने माणिक को छोड़कर हीरा को अपनाया

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त्रिपुरा की चुनाव में भाजपा की चुनावी अभियान का मुख्य नारा
‘माणिक नहीं हीरा चाहिए’ को लोगों ने पसंद करते हुए भाजपा को बहुमत दे दिया.
गौरतलब हो कि अपने चुनावी अभियान में नारा दिया था कि त्रिपुरा को माणिक नही हीरा चाहिए। मसलन H हाईवे, I का मतलब आईवे (डिजिटल कनेक्टिविटी), R से रोडवेज़ और A यानी एयरवेज़.
त्रिपुरा के लिए बीजेपी ने थ्री-टी का एजेंडा पेश किया जिसका मतलब है ट्रेड, टूरिज्म और ट्रेनिंग (युवाओं के लिए) और यही त्रिपुरा का सबसे बड़ा मुद्दा भी है.
बता दे कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने त्रिपुरा में 50 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 49 की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी. तब बीजेपी को यहां केवल 1.87 फ़ीसदी वोट मिले थे और वो एक भी सीट नहीं जीत सकी थी.

मजह पांच साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और 2018 के विधासनभा चुनाव में बीजेपी ने बहुतम के साथ 25 सालों से चली आ रहे वाम क़िले को ढहाया दिया है. इस लिहाज से भाजपा के लिए यह ऐतिहासिक भी है.