RSS के चार दिवंगत प्रचारकों को सच्ची श्रद्धांजलि है त्रिपुरा का चुनाव परिणाम

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PARMAR डाॅट काॅम

👉आज जीत के इस जश्न के साथ -साथ हमें अपने उन प्रचारकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है.👈

पूर्वोत्तर भारत के एक महत्वपूर्ण राज्य त्रिपुरा में भाजपा अपने बलबूते पर सरकार बनाने जा रही है. यह जीत इस लिए और महत्वपूर्ण है कि त्रिपुरा में भाजपा ने वामपंथियों को 25 वर्षो के सत्ता से बेदखल कर के प्राप्त किया है. इस जीत के बाद राजनैतिक विश्लेषक कई बाते कहें गें . लेकिन मुझे लगता है कि यह जीत हमारे अनेक स्वयंसेवकों, विशेषकर चार वरिष्ठ प्रचारकों के बलिदान का परिणाम है कि त्रिपुरा में संघ के राष्ट्रवादी विचार से प्रभावित कार्यकर्ताओ की आज सरकार बनने जा रही है. त्रिपुरा में राष्ट्रवाद का परचम लहराने के लिए हमारे अनेक कार्यकर्ताओ ने यातनाएं झेली व कई लोगों का बलिदान हुआ, तब जाकर आज कमल खिला है.
आज जश्न मनाने के साथ – साथ अपने उन दिवंगत कार्यकर्ताओ को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है.
हमें आज संघ के उन चार वरिष्ठ प्रचारक की याद आ रही है जिनका त्रिपुरा में अपहरण कर के हत्या कर दी गई .
गौरतलब हो कि 6 अगस्त 1999 को त्रिपुरा में वनवासी कल्याण आश्रम के कांचनछेड़ा छात्रावास से उग्रवादी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा (एन.एल.एफ.टी.) ने संघ के चार प्रचारकों का अपहरण कर लिया था। इस उग्रवादी संगठन ने एक पत्र के माध्यम से अपहरण की जिम्मेदारी लेते हुए इन चारों कार्यकत्र्ताओं को छोड़ने के बदले 2 करोड़ रुपए की मांग की और कहा कि यह मांग पूरी न होने पर चारों अपहृतों की मौत का वारन्ट जारी कर दिया जाएगा। इस धमकी भरे पत्र की सूचना भी त्रिपुरा सरकार को यथा समय दे दी गई थी लेकिन तत्कालीन त्रिपुरा सरकार ने कुछ नहीं किया और कुछ दिनों के बाद चारों प्रचारकों का हत्या किया गया शव बरामद हुआ.
आज जीत के इस जश्न के साथ -साथ हमें अपने उन प्रचारकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है.

👉तेरा वैभव अमर रहें माॅ, हम दिन चार रहें न रहें।।👈