सीवान जेल में विधिक सेवा दिवस  के अवसर पर बंदियों के बीच आयोजित हुआ जागरूकता  कार्यक्रम

✍परमार डाॅट काॅम:सीवान 
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♨सीवान [ 09 नवंबर ] विधिक सेवा दिवस  के अवसर पर शुक्रवार  को सीवान  मंडल  कारा  के महिला वार्ड में विधिक जागरूकता शिविर का  आयोजन   किया गया ।

इस अवसर पर  बंदियों को सम्बोधित करते हुए जेल लीगल  क्लीनिक के प्रभारी अधिवक्ता डॉक्टर विजय कुमार पांडेय ने कहा कि विधिक जागरूकता का सही उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगो को अधिक से अधिक विधिक सहायता के प्रेरित करना है।इसी उद्देश्य को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसको 9 नवंबर 1995 में इसे लागू किया था ।इस अवसर पर महिलाओं, चाइल्ड ट्रैफिकिंग,एससी/एसटी ,एसिड विक्टिम ,लेबर , वरिष्ठ नागरिक  सहित अन्य मामलों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम में रिटेनर अधिवक्ता  राजकुमारी रीना,रामनारायण लाल ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कारा उपाधीक्षक सन्तोष पाठक ने किया ।इस अवसर पर महिला बंदियो द्वारा पूछे गए सवालों का प्रश्नोत्तर भी दिया गया ।कार्यक्रम में  बन्दी पीएलवी राहुल कुमार,रुखसाना खातून,रामबाबू सहित कारा प्रशासन के कर्मी मौजूद थे ।
गौरतलब हो कि 09 नवंबर 1995 को स्थापित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से पूरे देश में आमलोगों के बीच विधिक जागरूकता के लिए अनेक कारण संचालित किए जाते है । प्राधिकार की शाखाएं  सर्वोच्च न्यायालय  सभी उच्च न्यायालय, सभी जिला व अनुमंडल न्यायालय सहित विभिन्न जेलों में कार्यरत है ।
अधिवक्ता डाक्टर पाण्डेय ने बताया कि प्राधिकार आमलोगों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ पूरे देश में मुकदमे की भीड़ को कम करने के लिए लोक अदालतों का आयोजन करता है । उन्होंने बताया कि प्राधिकार आमलोगों के बीच के  विवादों को निपटाने के लिए वैकल्पिक समाधानों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ अपराध पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजा देने की व्यवस्था करता है ।

[विधिक सेवा दिवस पर महिला बंदियों को संबोधित करते अधिवक्ता डाक्टर विजय कुमार पाण्डेय ]
उन्होंने बताया कि कोई भी महिला व बच्चें, अनुसूचित जाति / जनजाति के सदस्य, औद्योगिक कामगार, बड़े पैमाने पर आए प्राकृतिक / औद्योगिक आपदा, जातिय हिंसा, व बाढ, सुखाड एवं भूकंप से प्रभावित व्यक्तियों को प्राधिकार से निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराया जाता है । डॉक्टर पाण्डेय ने बताया कि  भारत का कोई   भी नागरिक जिनकी वार्षिक आय डेढ लाख से कम है, या फिर एचआईवी व कैंसर रोग से पीड़ित  है या एसिड हमलें से पीड़ित व्यक्ति व विकलांग व्यक्तियों  को भी निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता हैं ।