👉बिहार सरकार के अधिकारी  व मीडिया हाउस के मिलीभगत से हो रहा है  सरकारी खजाने की लूट 👈

🔴आपको इस खबर की  शीर्षक भले ही अटपटा लगें, लेकिन यह शत प्रतिशत सही है कि बिहार में सरकार व मीडिया हाउसों के मिलीभगत से सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है । 
अगर इस लूट के संबंध में तहकीकात किया जाए तो यह लूट वर्षों से जारी है, लेकिन कोई आवाज नहीं उठा रहा है ।यह सब इसलिए हो रहा है कि इस लूट में सरकार के अधिकारियों के साथ -साथ बिहार के लगभग सभी दैनिक समाचार पत्र शामिल है । 
इस लूट को समझने के लिए नियमित रूप से दैनिक समाचार-पत्रों में प्रकाशित होने वाले सरकारी  विज्ञापन पर नजर रखना होगा । सरकारी विज्ञापन के प्रकाशन के नाम पर हर वर्ष करोड़ो रूपये का सरकारी राजस्व का लूट ये सरकारी अधिकारी व मीडिया घराने कर रहे है ।
💢इस लूट की तरीका अनूठा है –
मान लीजिए कि कोई सरकारी सूचना प्रसारित करना है । इसके लिए समाचार-पत्रों में सरकारी विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है । सरकार इसके लिए मीडिया हाउस को लाखों रूपए भुगतान करती है । कुल मिलाकर एक समझने की जरूरत है कि आज के लगभग सभी समाचार-पत्र खबर के लिए कम सरकारी विज्ञापन के लिए ज्यादा चलते हैं ।
मान लेते है कि सरकारी सूचना प्रकाशित करना गलत नही है, लेकिन जब सूचना 29 अगस्त के सरकारी कार्यक्रम के लिए हो, और वह सूचना एक दिन बाद  जब 30 अगस्त के समाचार-पत्रों में प्रकाशित किया जाए तो उस सूचना के प्रकाशन का क्या औचित्य रह जाता है । सूचना से संबंधित विज्ञापन का प्रकाशन समाचार-पत्र निशुल्क तो प्रकाशित करेगें नहीं । उक्त विज्ञापन के प्रकाशन के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान तो किया जाएगा ही ।
हाल ही में ऐसा ही एक घोटाला बिहार में हुआ हैं ।
राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह के लिए एक सूचना बिहार सरकार के द्वार समाचार-पत्रों में विज्ञापन के रूप प्रतिशत किया गया था । यह सूचना 29 अगस्त के कार्यक्रम के लिए  आमंत्रण था, लेकिन इसका विज्ञापन 30 अगस्त के समाचार-पत्र में प्रकाशित किया गया । आयोजन बितने के बाद विज्ञापन प्रकाशित करने का क्या औचित्य हैं ।
लेकिन यह विज्ञापन इस लिए प्रकाशित किया गया की इस विज्ञापन के नाम पर सरकारी राजस्व का लूट जो करना हैं ।
मेरा यह पोस्ट एक उदाहरण भर हैं । अगर ठीक से जांच किया जाए तो इस प्रकार के लूट हमेश होते रहते हैं । 
आखिर लूट हो भी क्यों नहीं । यह लूट बिहार सरकार अधिकारी व मीडिया के लोग मिल कर रहें हैं । आखिर इन से सवाल पूछे तो कौन पूछे  ?
 ✍नवीन सिंह परमार
( लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट एवं ऑनलाइन न्यूज व फीचर्स सर्विसेज ” परमार डाॅट काॅम ” निदेशक हैं)