विश्व जल संरक्षण दिवस पर माँ यूथ ऑर्गेनाईजेशन में आयोजित हुई गोष्ठी
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छपरा : शुक्रवार को विश्व जल संरक्षण दिवस के अवसर पर माँ यूथ ऑर्गेनाईजेशन, बंगरा में ‘जल ही जीवन है’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस गोष्ठी में जल संचयन के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया गया। इस दौरान गोष्ठी में जल संरक्षण से होने वाले फायदे भी बताए गए।

गोष्ठी में संगठन के पूर्व अध्यक्ष नितान्त भाई ने बताया कि पहले गाँवों, कस्बों और नगरों की सीमा पर या कहीं नीची सतह पर तालाब अवश्य होते थे, जिनमें स्वाभाविक रूप में मानसून की वर्षा का जल एकत्रित हो जाता था। साथ ही, अनुपयोगी जल भी तालाब में जाता था, जिसे मछलियां और मेंढक आदि साफ करते रहते थे और जल पूरे गांव के और पशुओं आदि के काम में आता था। लेकिन अब यह मुश्किल से देखने को मिल रहा है। जरूरी है कि गांवों, कस्बों और नगरों में छोटे-बड़े तालाब बनाकर वर्षा जल का संरक्षण किया जाए।रेलवे में कार्यरत सतेष कुमार ने कहा कि जंगल कटने पर वाष्पीकरण न होने से वर्षा नहीं हो पाती और दूसरे भूजल सूखता जाता है। इसलिए वृक्षारोपण जल संग्रहण में बेहद जरूरी भूमिका निभाता है।

शिक्षक राठौर श्रीमान्त ने कहा कि यदि हम लोग समय रहते नहीं जागे तो हमारी आने वाली पीढी पानी के लिए तरसेगी। उन्होंने बताया कि एक सर्वे के अनुसान विश्व के 105 अरब लोगों को पीने के लिए शुद्व पानी नहीं मिल पा रहा है। संगठन की सचिव जया सोनल ने कहा कि तकनीकि व अन्य खराबी के चलते प्रत्येक दिन 17 से 45 प्रतिशत पानी बेकार में बह जाता है। उन्होंने बताया कि इजरायल में औसतन दस सेंंटीमीटर वर्षा होती है इस वर्षा में वह देश रिकार्ड अनाज का उत्पादन कर लेता है। उन्होने कहा कि हमें फैसलों की ऐसी नस्ल तैयार करनी होगी जो कम पानी ले।अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि ऐसा नही है कि हम लोग जानते नहीं है जल के महत्व के बारे में। दरअसल जानते सब हैं फिर भी सिर्फ अपने छोटे से लालच और शौक पूरे करने के लिए हम जिस तरह पेयजल की बर्बादी कर रहे हैं बहुत ही खतरनाक है. स्वच्छ और पेयजल का व्यर्थ बहाव ना करते हुए उसको सुनिश्चित तरीके से उपयोग में लाकर जल के बचाव की ओर कार्य किया जाना अत्यंत आवश्यक है।गोष्ठी में विद्यार्थियों यथा राजू साह, भीम महतो, विशाल गोस्वामी, सुमित कुमार, अर्जुन, रोहित आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।