
मांझी(सारन)। मांझी इंटर कालेज में प्राचार्य पद को लेकर वर्चस्व की कोई लड़ाई नही है बल्कि विकास व विध्वंश के बीच की लड़ाई है। पठन-पाठन की भी स्थिति सामान्य है। जबकि दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा गलत तरीके से लाभ उठाने को लेकर कालेज के शैक्षिक वातावरण को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। राजकिशोर गुप्ता न कभी अध्यक्ष रहे हैं और न ही भूमिदाता स्व बाबा लक्ष्मण प्रसाद के पोता हैं।हां यह बात सत्य है कि पहली बार बनाई गई समिति में उनके पिता स्व दयानंद प्रसाद का नाम शामिल है। श्री गुप्ता सुकदेव प्रसाद के पोता हैं। उनके द्वारा लगाये गए सारे आरोप अभी तक गलत साबित हुए हैं। अगर शिकायत है तो कोई भी विभाग को जाँच के लिए आवेदन दे सकता है। व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करने वाला कोई भी कालेज व बच्चों का हितैषी नही हो सकता। यह बातें बुधवार को प्रेस वार्ता करते हुए कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. रघुनाथ ओझा ने कही। बात चीत के क्रम में उनकी आंखें भर आईं वे भाव विह्वल हो गए। राजकिशोर गुप्ता द्वारा दिखाए जा रहें कागजातों को उन्होंने एक बार फिर झूठ का पुलिंदा बताया। उन्होंने प्रमाण के तौर पर कई महत्वपूर्ण विभागीय कागजात को दिखाते हुए बताया कि समिति के द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद हीं पृथ्वी नाथ ओझा को प्राचार्य पद का प्रभार प्रदान किया। जिसके बारे में पत्र के माध्यम विभाग को सूचित किया जा चूका है। उन्होंने बताया कि यह सत्य है कि खुद को पृथ्वी नाथ ओझा से सीनियर बताने वाले लोग वित्तीय लेनदेन में अनियमितता के दोषी पाए गए हैं तथा न वे योग्य हैं और न ही कॉलेज के विकास में उनका कोई योगदान है। जिन्होंने न कालेज के लिए जमीन दी है और आर्थिक सहयोग। मेरे ऊपर कालेज के डेवलपमेंट खाते से साढ़े तीन करोड़ रूपये के गबन का आरोप लगा कर केस किया गया था। जो निगरानी डीएसपी द्वारा की गई जाँच में गलत साबित हुआ है। डीएसपी ने उल्टे श्री गुप्ता पर 211 का केस दर्ज करने की भी अनुशंसा की थी। हमारे ऊपर अबतक कोई भी आरोप साबित नही किया जा सका है। उन्होंने लेटर दिखाते हुए कहा कि तत्कालीन एसडीओ के आदेश पर इलाहबाद बैंक में खाता खोला गया था। कालेज से सम्बंधित किसी भी खाते से राशि की निकासी कभी अकेले नही की गई है। सभी खातों का संचालन संयुक्त हस्ताक्षर से ही हुआ है।अतएव मेरे द्वारा राशि गबन करने का सवाल ही पैदा नही होता।
वास्तव में विवाद तब पैदा हुआ जब 2010 में कालेज को पहला अनुदान मिला था तब राजकिशोर गुप्ता द्वारा कथित रूप से कमीशन देने का दबाव बनाया गया था। कालेज प्रशासन व पूर्व से कार्यरत सभी शिक्षकों ने इस दबाव का पुरजोर विरोध किया था। श्री गुप्ता का कालेज व बच्चों के हित से कभी भी कोई सम्बंध नही रहा है। अभी तक जितने भी घटना-क्रम हुए हैं उन सब मामलों की जानकारी से डीईओ, बीडीओ, सीओ व स्थानीय थानाध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है। श्री ओझा ने कहा कि हम भले हीं सेवानिवृत हो चुके हैं लेकिन कालेज व बच्चों के हित में हम हमेशा से समर्पित रहे हैं और आगे भी रहेंगे।
10 जनवरी से कालेज के बच्चों की प्रैक्टिकल की परीक्षा होने वाली है। मगर दूसरे पक्ष के लोगों के द्वारा उसमें व्यवधान पैदा करने की आशंका है। जिस कक्ष में परीक्षा-सामग्री रखी गई है। उसमें श्री गुप्ता द्वारा जबरन ताला बंद कर दिया गया है। जिससे परीक्षा में परेशानी खड़ी हो सकती है।
इस सम्बंध में पूछे जाने पर थानाध्यक्ष नीरज मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों की मौजूदगी में गुरुवार को कार्यालय का दरवाजा खोलकर परीक्षा सामग्री निकाली जाएगी।
क्या कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी –
जिला शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार सिंह का कहना है कि मांझी इंटर कालेज गैर सरकारी है। जिसका संचालन प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है। जहाँ तक तालाबंदी कर परीक्षा बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है तो इसके निदान के लिए पुलिस का सहयोग लिया जाएगा। किसी भी कीमत पर परीक्षा बाधित नही होने दी जाएगी।




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