भक्त ही भगवान का मर्म जान सकता हैं- श्रीधर बाबा

मढ़ौरा, सारण ।
प्रखण्ड के बैदापुर सानी चंदा में चल रहे 11 दिवसीय विष्णु महायज्ञ में सन्त श्रीधर दास जी महाराज ने भगवान राम- केवट संवाद की कथा को श्रवण कराया। कहा कि भगवना का राम वनवास हो जाता है तो वह पूरे वनवास का समय चित्रकूट में व्यतीत करते हैं। उससे पहलें प्रभु राम गंगा को पार करने के बाद चित्रकूट धाम को प्रवेश करते हैं। वहीं कथा में राम केवट का गंगा के घाट पर अनुनय विनय करना और गंगा घाट पर पहुंचते ही केवट का राम के पांव धोने का वर्णन किया। “मांगी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मर्म मैं जाना।” भक्त ही भगवान की मर्म को जान सकता हैं । केवट कहता है कि प्रभु आपके चरणों में जैसा प्रभाव है कि वह किसी पत्थर मैं लग जाए तो पत्थर भी सुन्दर नारी बन जाती है। लेकिन प्रभु हमारी नाव तो लकड़ी की है और यह भी यदि नारी बन गयी तो हमारे पास कोई भी दूसरा साधन कमाने खाने के लिए नहीं बचेगा । राम, सीता, लक्ष्मण के पैरों को धोकर केवट उनको नाव में बिठाकर गंगा पार करते हैं। इस बहाने केवट भगवान का पांव को धोकर परम सौभाग्य और आनंद को प्राप्त कर लेता है ।




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