दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा, कलम दवात के देवता चित्रगुप्त पूजन एवं भाई दूज(भैया दूज) मनाया जाता है। विगत चार दशकों से गोवर्धन पूजा का आयोजन कर रही, लाल बाजार नोनिया टोली निवासी कलावती देवी का कहना है कि यह प्रकृति की पूजा है। जिसका आरंभ श्रीकृष्ण ने किया, कलावती देवी कहती हैं कि यह पूजा इको-फ्रेंडली व्यवहार को बढ़ावा तो देता ही है। इस अवसर पर आस-पास की महिलाओं, युवतियों व बच्चों के एक साथ एकत्रित होकर त्योहार मनाने से आपसी प्रेम, भाईचारा व सहयोग की भावना बढ़ती है। सचमुच यह परंपरा व संस्कृति कितनी विशिष्ट है। मुख्य रुप से छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, इस आयोजन में भाग लेती हैं। बढ़ती आबादी और शहरीकरण से यह आयोजन अब प्रभावित हो रहा है। कारण है अधिक संख्या में महिलाओं का एक जगह बैठने के खुले स्थान की कमी होना है। पिंकी देवी, पूजा देवी, लक्ष्मी देवी, गिरिजा देवी, शारदा देवी, रेखा देवी, चंचल देवी, प्रेमा देवी, रानी देवी आदि ने कहा कि भाई दूज या भैया दूज का पर्व भाई-बहन के अपार प्रेम व समर्पण का प्रतीक है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानि दीपावली के दो दिन बाद आने वाले इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यम की पूजा का भी विधान है। रक्षाबंधन के बाद भाईदूज ऐसा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भाई-बहन बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। रक्षाबंधन में भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का संकल्प लेता है भैयादूज में बहनें भाईयों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।





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