पटना। नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि बजट में न तो विकास की कोई दिशा है और न ही इसमें राज्य की बदहाली को दूर करने का कोई विजन है। बजट में गांव, गरीब और बेरोजगारों की घोर उपेक्षा की गई है। बजट पूरी तरह से युवा बेरोजगारों की आशाओं व उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है। एक बार फिर सरकार ने युवाओं को 10 लाख नौकरियों का झुनझुना थमा कर उन्हें निराश किया है। बजट में किसान, गरीब, गांव और मजदूरों के लिए एक भी ऐसा प्रभावकारी पहल नहीं दिख रहा है जिससे उनकी जिन्दगी को बेहतर बनाने की उम्मीद जगे। 2.61 लाख करोड़ के बजट प्रस्ताव में योजनाओं पर मात्र 38.20 प्रतिशत यानी 1 लाख करोड़ खर्च करने का अनुमान किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है विकास सरकार की प्राथमिकता में नहीं है।
उन्होंने कहा है कि भर्ती एजेंसियों को कुल 63,900 पदों की रिक्तियां भेजने का दावा करने वाली सरकार पहले यह बतायें कि बीपीएससी, बीटीएससी और बीएसएससी सहित अन्य आयोगों, बोर्डों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अराजकता को दूर करने के लिए उसके पास क्या उपाय है? सरकार यह भी बतायें कि पिछले तीन-चार सालों से जो बहाली की प्रक्रिया चल रही है, उनका क्या होगा? विभिन्न पात्रता उत्तीर्ण शिक्षक अभ्यर्थियों से भी सरकार ने छल करते हुए केवल इतना भर कहा है कि 7वें चरण की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रियाधीन है। दरअसल सरकार युवाओं के सपनों को रौद रहीं है। बिहार के 78 लाख युवा स्नातक बेरोजगारों से सरकार को आंखे मिलाने की हिम्मत नहीं है। कैबिनेट की पहली बैठक में 10 लाख सरकारी स्थायी नौकरियां देने का झांसा देने वाली सरकार युवाओं के साथ छल कर रही है।