
प्राकृतिक खाद्य पदार्थ में होती हैं प्रचुर मात्रा
छपरा:-सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए प्रोटीन, वसा एवं कार्बोहाइड्रेट के साथ विटामिन की सही मात्रा भी बेहद जरूरी हैं। ह्रदय, स्नायु, मस्तिष्क एवं हड्डियों से संबंधित व्याधियों में विशेषकर विटामिन बी-12 एवं डी-3 युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से इनकी कमी होने वाले अनेक गम्भीर रोगों से बचा जा सकता हैं।
स्नायु रोगों से शिशु का बचाव
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में बी 12 की कमी के कारण माता के स्वास्थ्य के साथ नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में विटामिन बी 12 की कमी के कारण शिशुओं में स्नायु सम्बंधित रोगों की संभावना बढ़ जाती हैं। विटामिन बी 12 प्रसव के दौरान होने वाले विभिन्न जटिलताओं जैसे अचानक गर्भपात, उच्च रक्तचाप एवं पेशाब में प्रोटीन की अधिकता से माता का बचाव करता हैं।

हड्डी एवं ह्रदय रोगों से बचाव
विटामिन डी 3 हड्डी एवं ह्रदय रोगों से बचाव करता हैं इसकी कमी के कारण बच्चें रिकेट्स एवं युवा ऑस्टियोमलेसिया नामक हड्डी रोग से पीड़ित हो जाते है। इन दोनों रोगों में हड्डी की कठोरता खत्म होने लगती हैं एवं लचीला हो जाता हैं इससे हड्डी में विभिन्न प्रकार के रोग होने लगते है।
उम्र बढ़ने के साथ ब्यक्ति का शरीर विटामिन डी को इसके सक्रिय अवस्था में परिवर्तित करने में अक्षम होने लगता हैं जिसके कारण शरीर में विटामिन डी 3 की कमी होने लगती हैं।
वरीय चिकित्सक डॉ अमरनाथ राव ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान विटामिन बी 12 की कमी बच्चों में तंत्रिका नली से संबंधित समस्याएं पैदा होने की संभावना में 5 गुणा इज़ाफ़ा हो जाता हैं। गर्भवती महिलाओं में विटामिन बी 12 की कमी से शिशु में हड्डी सम्बंधित समस्या के साथ मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता हैं। विटामिन बी 12 की कमी से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अंडा, मीट, मुर्गा, एवं दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में है प्रचुरता
प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में विटामिन बी 12 एवं डी 3 की प्रचुर मात्रा होती हैं जिसके नियमित सेवन से इसकी कमी को दूर किया जा सकता हैं। मछली, मीट, मुर्गा, अंडा, दूध व दूध से बने पदार्थों में विटामिन बी 12 पाया जाता है। सूर्य विटामिन डी 3 का सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक स्रोत हैं।




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