चुनाव जीतने से पाप नही धुलते, सन्यासी सीएम की शरण में अपराधी?
अदीब सैफी
लखनऊ 8 मई। कभी राजा भैया तो कभी पत्नी की हत्या में फंसे अमनमणि त्रिपाठी मंच पर। माना कि दोनों निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, मगर चुनाव जीतने से किसी के पाप तो कम नहीं हो जाते।
वो भी तब जब सीएम योगी कानून का राज स्थापित करने का प्रण किए बैठे हों। तब ऐसी तस्वीरें चुटकुला बना रहीं। विपक्ष को बैठे-बैठाए मुद्दों का हथियार थमा रहीं। दागियों से दूरी की बात सिर्फ जुबानी न हो बल्कि दिखनी भी चाहिए।
आप सीएम हैं। जाहिर सी बात है अच्छे और बुरे। मनी और मसल्समैन दोनों लोग शरण में आने को आतुर होंगे। क्योंकि आपके पास पावर है। मगर संन्यासी के मंच पर संन्यासी न सही, कम से कम साफ-सुथरी छवि के लोग ही आएं। इतना तो फर्क और ख़्याल रखना ही होगा। सवाल क़ानून व्यवस्था के इक़बाल का है ।नहीं तो रेप में फ़ंसे गायत्री प्रसाद के साथ मंच शेयर करने वाले सीएम अखिलेश और आज के एक संन्यासी सीएम के बीच फर्क क्या रह जाएगा।




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