गंगा के दलदल में कई दिनों से फंसा घोड़ो का जोड़ा

दलदल में फंसे घोड़े को निकालने में स्थानीय लोग बिफल, प्रशासन नही ले रहा संज्ञान

छपरा
दिघवारा स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के मलखाचक गांव के समीप गंगा नदी के दलदल में विगत 4 दिनों से घोड़े का जोड़ा दलदल में फस गया है। भूखे प्यासे दलदल में फंसे घोड़े पर ग्रमीणों की नजर जब पड़ी तो पीड़ित भावस्थिति देख सभी लोग सन्न राह गए। स्थानीय लोगो ने बताया कि घोड़े के फसे क्षेत्र के तरफ दलदल ज्यादा होने के कारण ग्रामीणों का आनाजाना कम था इस वजह से दलदल में फंसे घोड़े पर नजर देर से पडी । दियारे जाने वाले किसान युवाओ को जब इन जानवरों के फसे हुवे होने की जानकारी मिली तब उन्होंने दलदल से निकालने का प्लान बनाया । और रविवार को रेस्क्यू में काफी मेहनत कर सुरक्षित निकालने का प्रयास किये ।लेकिन युवाओं के काफी प्रयास के बावजूद घोड़े का दल नही निकल पाया ।आखिरकर कर युवाओं का दल निराश होकर लौट गया। वही उनके द्वारा इसकी सूचना भी प्रसासन को भी दी गयी है।

प्रशासन को मदद के लिए गुहार पर कोई संज्ञान नही

घोड़े के फंसे होने पर जब स्थानीय युवाओ द्वारा निकालने का प्रयास बिफल रहा तो प्रसाशनिक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई गई लेकिन कोई असर नही दिखा । स्थानीय लोगो द्वारा फ़ोन से लेकर मैसेज द्वारा फंसे घोड़े को निकालने का मदद मांग गया लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नही रेंग रहे।स्थानीय युवक बलवंत द्वारा अंचलाधिकारी को लिखा गया मैसेज -“मेरा नाम बलवंत कुमार पिता विजय प्रसाद ,ग्राम +पोस्ट +थाना -दिघवारा, वार्ड नंबर -14 ,जिला सारण (बिहार )का स्थाई निवासी हूं यह वीडियो ग्राम मलखाचक जो दिघवारा प्रखंड के अंतर्गत आता है गंगा के किनारे पर का है मलखा चक गांव से कुछ ही दूरी पर दियारा में एक घोड़ा और एक घोड़ी पिछले 4 दिनों से दलदल में फंसे हुए हैं गांव वालों ने काफी प्रयास किया पर उसे हम लोग मिलकर निकाल नहीं पाए आज सुबह यानी 7 नवंबर 2021 को भी हम लोगों ने काफी प्रयास किया पर निकाल नहीं पाए अगर जल्द कुछ नहीं किया गया तो भूख और प्यास से वे दोनों मर जाएंगे इसलिए श्रीमान को मैं यह जानकारी दे रहा हूं ताकि आपसे कुछ मदद मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके”

दियारा में काम के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले घोड़े गंगा के दलदल में फंस गए

गंगा नदी के दलदल में फंसे घोड़ो का का दियारा क्षेत्र में फसल अनाज और जरूरत की बस्तु ढोने के लिए उपयोग किया जाता है। फंसे घोड़ो के बारे में भी इसी तरह का अनुमान लगया जा रहा है हालांकि घोड़ो के मालिक का अभी पता नही चल पाया है। गंगा नदी में पानी बढ़ने के बाद बहुतायत क्षेत्र में दलदल की स्थिति बन जाती है जिसमे जीव जंतुओं के फंस जाने का डर बना रहता है।