भाजपा राज में शिक्षा से वंचित है अल्पसंख्यक बेटीयां
आजाद नेब
जयपुर 17 मार्च। सरकार कई साल से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का ढिढ़ोरा पीट रही है। लेकिन जिले में एक ऐसा भी गांव जहां की बेटियां स्कूल शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा तो दूर माध्यमिक शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पा रही हैं। यह कड़वी सच्चाई है तहसील के ग्राम पंचायत जीवणदेसर के गांव कालूसर की। गांव पूरी तरह से  अल्पसंख्यक गांव है। इसमें दो चार घरों को छोड़कर सभी कायमखानी समाज के लोग हैं। 250 परिवारों के इस गांव की आबादी करीब 15 सौ है। गांव में केवल 8वीं तक स्कूल है। इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सा व पेयजल की सरकारी सुविधा नहीं है।  
शिक्षा के अभाव में गांव के स्कूल में 8वीं तक की पढ़ाई करने के बाद अधिकांश युवा व युवतियां आगे से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। इसका नतीजा है गांव में केवल एक युवा ही लिपिक बन पाया है। गांव की चार बेटियां आबीदा, सुमैया, प्रवीण बानो व रूखसाना ही 10वीं पास हैं। अधिकतर ग्रामीण खेती का कार्य करते हैं। गांव के करीब 250 लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। इस समय स्कूल में 251 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसमें 153 बालिकाएं हैं।  
बुजुर्गों के मुताबिक करीब चार सौ साल पहले कालूराम सारण ने गांव की स्थापना की थी। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी सरकार यहां पर पेयजल व प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा नहीं कर सका। ना ही उप स्वास्थ्य केन्द्र और ना ही आयुर्वेद औषधालय व उच्च जलाशय। पानी की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ परिवारों ने मिलकर ट्यूबवैल की व्यवस्था कर ली। लेकिन आज भी सार्वजनिक खेलियां सूखी पड़ी रहती हैं। सरकारी सुविधा के नाम पर केवल एकउच्च प्राथमिक विद्यालय है। गांव में जल निकासी की भी सुविधा नहीं है। जीएसएस से लम्बी दूरी होने के कारण 
आए दिन फाल्ट की समस्या बनी रहती है।गांव में स्वास्थ्य केन्द्र नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं व बच्चों का समय पर टीकाकरण भी नहीं हो पाता है। स्वास्थ्य सेवा के लिए 12 किमी दूर सरदारशहर या पूलासर गांव जाना पड़ता है।  
”गांव में 8वीं तक स्कूल के अलावा कोई जरूरी सुविधा नहीं है। ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जाने के लिए पहले सरदारशहर होकर जीवणदेसर जाना पड़ता है। जो दूर पड़ता है, सीधे पूलासर से जोड़ दिया जाए तो इस समस्या का निदान हो सकता है।” 
रखुदीन खां, कालूसर