बलात्कार अपराध व इसके खिलाफ कानूनी अधिकार क्या है जाने
एडवोकेट फारूक मंसूरी राजस्थान हाईकोर्ट
भीलवाड़ा 2 मई। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के मुताबिक बलात्कार तब घटित होता है जब एक पुरुष किसी महिला के साथ सम्भोग करता है । ऐसा संभोग जो
जो उसकी इक्छा के विरुद्ध हो, अथवा बिना उसकी सहमति के,उसकी सहमति से , जब उसकी इस प्रकार की सहमति, उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्तिके मृत्यु का भय अथवा गंभीर चोट करने का भय दिखाकर किया गया हो, याउसकी सहमति से, जब पुरुष उसे धोखे में रखकर उसे यह विश्वास दिलाता है कि वह पुरुष उस महिला का वैधिक पति है या ,उसकी सहमति से, जो उसकी मानसिक पागलपन की वजह से हो, अथवा नशे की हालत में हो, अथवा नशे कीहालत में हो या जब वह अपनी सहमति से उत्पन्न होने वाले परिणामों को समझनेमें असमर्थ हो। सहमति या बिना सहमति के सम्भोग- जब महिला 16 साल से कम अवस्था में हो।संभोग का मतलब क्या है? बलात्कार के अपराध में छेदन करना आवश्यक होता है – चाहे वह थोड़ा सा क्यों ना हो। छेदन की मात्रा कितनी है, इसका कोई महत्व नहीं होता है, यह आवश्यक नहीं कियोनि विदीर्ण हुई हो और वहां वीर्यपात होना चाहिए। बिना थोड़ा छेदन किए बलात्कार नहीं हो सकता है ।
पत्नी के साथ बलात्कार
भारतीयदंड संहिता की धारा 376 के मुताबिक जब कोई पुरुष अपनी सोलह साल से कम की पत्नी के साथ सम्भोग करता है तो वह बलात्कार समझा जायेगा। यहां कानून कीनीति यह है कि वह अपरिपक्व अवस्था वाली बच्चियों को सम्भोग से सुरक्षा प्रदान करे।
नपुंसक बलात्कार नहीं कर सकता है।
सम्भोग करने में असमर्थ होने के कारण इस प्रकार के पुरुष को इस कृत्य का प्रयास करने के लिए दोषी नहीं माना जा सकता है , लेकिन उसे धारा 354 के तहत अश्लील व्यवहार करने के लिए दोषी ठहराया जा सकता है ।
बलात्कार के बाद बचाव
नजदीक के किसी भी पंजीकृत डॉक्टर से अपनी जांच कराएं। यह आवश्यक नहीं है कि वह डॉक्टर एक सरकारी डॉक्टर हो।जितनी जल्दी संभव हो सके, नजदीक के थाने में जाएं और अपनी प्रथम सूचना दर्ज कराएं। और नि:शुल्क प्रथम सूचना रिपोर्ट की कॉपी प्राप्त करें। यदि आवश्यक हो तो आप अपने वकील को भी साथ थाने चलने के लिए कहें। यह आपका मौलिक अधिकार है कि आप अपनी पसंद का वकील चुनें व उससे सलाह मशविरा करें।आप यह भी मांग करें कि जिस व्यक्ति ने आपके साथ बलात्कार किया है उसकी भी तुरंत डॉक्टरी जांच हो। यह सबूत के लिए मददगार होगा।जब तक आपका डॉक्टरी परीक्षण न हो जाय तब तक आप न तो कपड़े बदलें और न ही आप स्नान करें- इससे सबूत धुल जायेगा। अभियुक्त से प्राप्त जो भी सामान हों, जैसे कपड़े, चप्पल, चश्मा, घड़ी आदि को संभालकर रखें व उन्हें पुलिस की हिफाजत में सौंप दें। जिस स्थान पर यह अपराध घटित हुआ है उसकी यथावत स्थिति को बनाए रखें जब तक कि पुलिस अधिकारी उस स्थान की रिपोर्ट तैयार नहीं कर लेते हैं । उस स्थान की जांच के बाद जो रिपोर्ट तैयार की जाती है , वह किए गए अपराध के संबंध मेंहालात-सबूत के रुप में काम आयेंगे।आप जब पुलिस स्टेशन जाएं तो अपने किसी पुरुष मित्र या संबंधी को साथ ले लें।
जब पुलिस एफआईआर न दर्ज करे
अपनी शिकायत की कॉपी या प्रतिलिपि रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा जिला उपायुक्त अधिकारी (DSP) को पत्र लिखें।राज्य के गृह सचिव या पुलिस के डायरेक्टर जनरल को लिखें या मिलें।अपनी शिकायत चेयरमैन, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (फरीद कोट हाऊस, कापरनिकस मार्ग, नई दिल्ली-110001) को भेजें। या अपने नजदीकी राज्य मानवाधिकार आयोग को भेजें जो कि हर राज्य में गठित है।स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी रुप से शिकायत दर्ज करें।हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर करें।हाईकोर्टया सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखें। उपयुक्त मामलों में यह पत्र सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट द्वारा रिट पत्र याचिका माने जा सकते हैं ।
कानूनी साक्ष्य
महिला की उम्र को निश्चित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र – जो उसे अपने स्कूल से मिला हो या पंचायत कार्यालय से मिला हो या जन्म पंजीकरण कार्यालय से उसने प्राप्त किया हो। डॉक्टरी साक्ष्य से जुटाए गए सबूत-पुरुष या महिला के गुप्तांग पर कोई चोट है,उस पुरुष या महिला के किसी अन्य शारीरिक अंगों पर कोई चोट के निशान हैं, जो संघर्ष का परिणाम हो सकते हैं,उस दोषी पुरुष या पीड़िता स्त्री के कपड़ों पर वीर्य या खून के छींटे हैं,पीड़िता या दोषी पुरुष के बालों का एक दूसरे के शरीर पर पाया जाना,स्त्री व पुरुष की अनुमानत: आयु जो उनके अंगों के भोतिक विकास या दांतों को बढ़ने आदि के अध्ययन से पता चलता है ।जिस महिला के साथ बलात्कार हुआ है पुलिस अधिकारी उसके अंदरुनी कपड़ों को रासायनिक जांच के लिए भेजें। डीएनए जांच द्वारा अपराध स्थल पर प्राप्त खून और वीर्य को अपराधी के खून व वीर्य से मिलकर अपराध सिद्ध किया जा सकता है।भारतीय साक्ष्य अधिनियम की की उपधारा 114-अ के मुताबिक बलात्कार के एक मामले में अगर अपराधी द्वारा यौन छेदन सिद्ध हो गया है और अब यह निश्चयकरना होता है कि यह महिला की स्वीकृति या उसकी गैर रजामंदी से हुआ है , तब न्यायालय को या मानना ही चाहिए कि बलात्कार में उसकी सहमति नहीं थी-अगर वह महिला न्यायालय में यह बयान दे रही है कि उसने स्वीकृति दी ही नहीं।बलात्कार के आरोप में मरते हुए व्यक्ति का बयान साक्ष्य के रुप में स्वीकार किया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है ।




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