गौ-रक्षा सिर्फ बहाना है, मुसलमानो से झगडना असली मकसद है
सलीम दुर्रानी
अलवर 6 अप्रैल। गौ-रक्षा सिर्फ बहाना है, तुम्हें सिर्फ कमज़ोरों की हत्याएं करनी है, उनके हाथ पैर तोड़कर एक पूरे समुदाय में भय की लहर पैदा करना है, अन्यथा तुम्हारी आस्था जिस तरह राजस्थान में गाय के साथ मुस्लिमों को बस देख भर लेने से बिलबिला जाती है, उस हिसाब से तुम पूर्वोत्तर में गोमांस पर बीजेपी के रुख को देखकर क्रोध से पागल हो जाते, पर तुम्हारे कानों पर जूं तक न रेंगी
वास्तविकता ये है कि गाय तुम्हारी आस्था का विषय है ही नही, जिस तरह तुम्हारी आस्था मत्स्यावतार के बावजूद मछलियों पर नही है, कच्छप अवतार के बावजूद कछुओं पर नही है, वराह अवतार के बावजूद शूकरों पर नही है… ऐसे ही गायों पर भी आस्था नही है तुम्हारी, केवल अल्पसंख्यकों के साथ क्लेश करने के लिए तुम इतनी आस्था दिखाते हो वर्ना गायें तुम्हारे ही हाथों में रहती हैं जिनके बूढ़ी हो जाने के बाद तुम उन्हें सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ देते हो, पॉलीथिन खा खा कर मरने के लिए छोड़ देते हो… देखीं हैं मैंने सड़कों पर रिस्ते ज़ख्मों वाली गायें तड़पते, तब तुम उनके ज़ख्मों को धोने नही आते तुम नाक पर रुमाल रखकर हट जाते हो ये होती है आस्था ?
ये ढोंग है, मान लो कि नफरत ने तुम्हारे दिलों को मैला कर दिया है, मान लो कि सच्चाई, प्रेम और दया जिसको तुम हिन्दू धर्म की प्रमुख सीख बताते थे, अब वोही गुण तुम्हारे व्यक्तित्वों में रत्ती भर नही बचे, मान लो कि तुम अब धार्मिक व्यक्ति नही रहे .. अब तुम केवल हत्यारे हो, तुम सब हत्यारे हो जो इस दिखावे की आस्था को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष समर्थन देते हो, जिस आस्था का मकसद केवल नफरत भड़काना है




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