सारण :सांसद राजीव प्रताप रुडी ने की पहल
भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने की पहल तेज, लोकसभा में उठा मुद्दा
#श्री रुडी कोे राज्यसभा सांसद बनने पर भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा न होने से दुबारा लेना पड़ा था शपथ।
# श्री रुडी ने प्राईवेट मेंबर बिल के माध्यम से भी भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने का पहले भी किया है प्रयास
छपरा 09 फरवरी, 2018
भोजपुरी एक मीठी एवं सरल भाषा है जिसका इतिहास बहुत ही पुराना है। यह प्राचीनता के स्तर पर भी प्राचीन भाषा है। देश की कई भाषाएं आठवीं अनुसूची में शामिल है, उन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या भोजपुरी से कम भी है। संसद में भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने के प्रश्न केे उत्तर में जो सरकारी आंकड़ा प्रस्तुत किया गया उसमें सन 2001 की जणगणन के अनुसार देश में भोजपुरी बोलने वालो की संख्या तीन करोड़ तीस लाख निन्यानवे हजार चार सौ संतानवे थी। अनुमानतः यह आंकड़ा वर्तमान समय में 4 करोड़ से ज्यादा होगा। सड़क से सदन तक भोजपुरी की लड़ाई लड़ने वाले सारण लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद राजीव प्रताप रुडी ने मंगलवार, 6 फरवरी को भोजपुरी को आठवीं अनुसुची में शामिल करने संबंधी अपने संसद में पुछे गये प्रश्न के लिखित उत्तर मिलने के उपरान्त उक्त बातें कही। उन्होंने आगे कहा कि आज भोजपुरी भाषा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। भोजपुरी देश में ही नहीं अपितु कई देशों में भी बोली जाती है। इस भाषा को जानने और समझने वालों का विस्तार सभी महाद्विपों पर है। सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, टोबैगो और फिजी आदि देशों में भोजपुरी प्रमुखता से बोली जाती है। इसके विस्तार में हमारी भागीदारी सर्वदा रहेगी। विदित हो कि राज्यसभा से पहली बार संासद बनने पर श्री रुडी ने भोजपुरी भाषा में ही शपथ लिया था, पर वर्तमान की तरह उस समय भी भोजपुरी
भाषा के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न होने के कारण उन्हें पुनः हिंदी में शपथ लेना पड़ा था।
भोजपुर को संवैधानिक दर्जा देने की पहल में एक और कदम आगे बढ़ते हुए संसद के बजट सत्र में श्री रुडी ने सरकार द्वारा भोजपुरी के संवर्धन और संरक्षण के लिए उठाये गये कदम, भोजपुरी को संविधान की आठवी अनुसूची में शामिल करने संबंधी सवाल उठाया था। इसका लिखित जवाब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने देते हुए कहा कि हिंदी भाषा के तहत आने वाली मातृभाषाओं में से एक भोजपुरी, हिंदी की एक प्रमुख विविधता वाली भाषा मानी जाती है। शैक्षणिक कार्यों में हिंदी के लिए जब कोई काम किया जाता है तब भोजपुरी को यथेष्ट मान्यता दी जाती है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय हिंदी संस्थान द्वारा भोजपुरी-हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश भी प्रकाशित किया गया है। गृह राज्य मंत्री श्री अहीर ने बताया कि संविधान की आठवीं अनुसूची में भाषा को शामिल करने के लिए कोई समय-सीमा निश्चित नहीं की जा सकती है।
श्री रुडी ने कहा कि भोजपुरी को केवल भारतीय भाषा कहकर इसकी उपेक्षा कतई नहीं की जा सकती। भोजपुरी को न केवल सम्मानजनक एक निश्चित मुकाम दिलाने बल्कि आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल की यह सबसे लोकप्रिय भाषा तो है ही भोजपुरी बोलने वालों की संख्या पूरे भारत में फैली है। इसी को मद्देनजर रखते हुए सांसद श्री रुडी ने लोकसभा में यह प्रश्न उठाया था। पूर्वांचल से आने वाले सांसद श्री रुडी ने पूर्व में भोजपुरी भाषा पर सदन के पटल पर एक प्राईवेट मेंबर बील प्रस्तुत किया था।