
सारण:हादसे के इंतजार मे ब्रिटिश कालीन बोहटा पुल
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देवेंद्र कु सिंह की रिपोर्ट
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रसूलपुर /एकमा
रसूलपुर -चैनपुर राजपथ पर अवस्थित है यह पुल।पुल पर बने गड्ढे कभी भी बन सकते हैं हादसे का कारण।रसूलपुर /एकमा – रसूलपुर -चैनपुर राजपथ संख्या 47 पर अवस्थित बोहटा नदी पर जर्जर हो चुके ब्रिटिश कालीन निर्मित पुल कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।पुल पर करीब एक फीट से भी अधिक गहरा एक गड्ढा व छोटे छोटे कई गड्ढे खतरे को आमंत्रण दे रहा है।बरसात के मौसम में पानी से भरे गड्ढों में बसें व भारी मालवाहक वाहनें जब पुल से गुजरती हैं तो पुल का निचला हिस्सा हिलने लगता है।हाँलाकि साईकिल मोटरसाईकिल से यात्रा करने वाले कई यात्री भारी वाहनों को धीरे चलने का भी संकेत देते हैं ।सारण का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बाबा महेन्द्रनाथ और छपरा -सीवान एन एच 85 से जूड़ा यह राजपथ सीवान जिले के आधा दर्जन प्रख॔ड कार्यालयों के अलावे सीमावर्ती राज्य यूपी को भी जोड़ता है।सीवान के सिसवन,रघुनाथपुर,दरौली,हसनपुरा आदि प्रख॔डों से हजारों लोग इस राजपथ से सूबे की राजधानी पटना का आवागमन करते हैं ।सरकारी परिवहन समेत एक दर्जन से अधिक बसें और अनगिनत मालवाहक ट्रक आदि वाहनें चलती हैं ।इस महत्वपूर्ण सड़क से लोग छपरा-सीवान रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों को पकड़कर पटना,कोलकाता,दिल्ली जाने के लिए नजदीकी स्टेशन रसूलपुर स्थित महेन्द्रनाथ हाॅल्ट व एकमा जाते हैं ।सारण जिले के एकमा प्रख॔ड के देवपुरा, बलिया,बनपुरा, असहनी, अतरसन पंचायतों के दर्जनों गाँवों के हजारों लोगों के लिए यह सड़क लाईफ लाईन भी माना जाता है।ऐसे में यदि पुल की क्षति पहुँचती है तो लाखों की आबादी प्रभावित हो सकती है।स्थानीय लोगों का जिला व प्रखंड कार्यालयों से संपर्क भंग हो सकता है।यही नहीं एकमा, रसूलपुर, योगियां, घुरापाली, अतरसन स्थित स्कुलों व काॅलेजों में छात्रों की पढ़ाई भी ठप हो सकती है।




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