File Photo: Pawan Pratap Singh

सारण के प्रधान शिक्षक पवन प्रताप सिंह ने ओजोन परत के संरक्षण और विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी जगाने पर दिया जोर।

Saran News (बिहार), 16 सितंबर:
प्रकृति ने पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखने के लिए कई अनूठी व्यवस्थाएं की हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ओजोन परत, जिसे ‘पृथ्वी का सुरक्षा कवच’ भी कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को ‘विश्व ओजोन दिवस’ मनाया जाता है। इस विशेष दिन का मुख्य उद्देश्य जन-मानस को ओजोन परत के महत्व, इसके क्षय के कारणों और संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना है।

ओजोन परत का महत्व और इसके क्षय के खतरे

ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी यानी UV किरणों को सीधी पृथ्वी पर आने से रोकती है और उन्हें अवशोषित कर लेती है। यह कवच मानव जीवन, पशु-पक्षियों, वनस्पतियों और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करता है। यदि यह परत कमजोर होती है, तो इंसानों में त्वचा संबंधी गंभीर रोग, आंखों की समस्याएं और अन्य प्रतिकूल स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

ओजोन परत में हो रहे क्षय का सबसे बड़ा कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोजन, कार्बन टेट्राक्लोराइड और मिथाइल क्लोरोफॉर्म जैसे रसायन हैं। पुराने रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, एयरोसोल स्प्रे, फोम निर्माण और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में इनका बड़े पैमाने पर उपयोग होता रहा है। समतापमंडल में पहुंचकर ये गैसें ओजोन अणुओं को नष्ट करती हैं। इसलिए पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का प्रयोग आज समय की सबसे बड़ी मांग है।

ऐतिहासिक मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और वैश्विक पहल

ओजोन परत के संरक्षण की दिशा में 1987 का ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ एक बेहद सफल और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय कदम रहा है। इसके जरिए ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक पदार्थों के उत्पादन और उपयोग पर कड़े नियंत्रण लगाए गए हैं, जिससे स्थिति में सुधार देखा गया है।

शिक्षकों और विद्यालयों की अहम भूमिका

सारण जिले के जिला तकनीकी समूह (PBL) और जिला साधन सेवी (FLN) के प्रधान शिक्षक पवन प्रताप सिंह का मानना है कि एक शिक्षक के रूप में हमारा दायित्व केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनमें पर्यावरण के प्रति सच्ची संवेदनशीलता जगाना भी है। विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर हम बच्चों को प्रकृति का सच्चा प्रहरी बना सकते हैं।

आइए, इस विश्व ओजोन दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि स्वयं जागरूक बनकर अपने विद्यार्थियों और समाज को जागरूक करेंगे, ताकि पृथ्वी के इस अमूल्य सुरक्षा कवच को सुरक्षित रखा जा सके।