☀राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के सैकड़ों बच्चों का नि:शुल्क इलाज हो रहा

✍️परमार मीडिया नेटवर्क

शिवहर/07 अक्टूबर:राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इन बच्चों की जन्मजात विकृति दूर करने के लिए इस योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में स्क्रीनिंग के बाद सामने आ रही जन्मजात बीमारी के बाद बच्चों के ऑपरेशन करवाए जा रहे हैं। चिकित्सा विभाग की ओर से पूरे जिले में प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो टीमों का गठन कर जन्मजात बीमारियों की जांच कर उनकी स्क्रीनिंग करने के बाद बच्चों का इलाज करवाया जा रहा है।

👉उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा जाता है इलाज के लिए:

जिला समन्वयक डॉ. सुजीत कुमार कौशिक ने बताया बीमारी से ग्रसित बच्चों को संदर्भित कार्ड देकर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान में भेजा जाता है। जहां जांच-इलाज पूरी तरह निशुल्क है। योजना के तहत जिले के सभी पीएचसी में बच्चों के इलाज के लियेबसेंटर संचालित हो रहा है। जिले से आरबीएसके टीमों द्वारा बच्चों का निशुल्क पंजीयन करवा जाता है। इसके बाद संदर्भित बच्चे आइजीआइएमएस पटना और एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर भेजे जाते हैं। जहां जन्मजात जटिल बीमारियों की जांचें व इलाज निशुल्क होता है।

👉कटे हुए होठ और तालू गंभीर समस्या:

जिला समन्वयक डॉ. सुजीत कुमार कौशिक ने बताया इस विकृति को अंग्रेजी में क्लेफ्ट पैलेट कहते हैं। इससे रोगी के मुंह के अंदर तालू का पूरा विकास नहीं होता है। मुंह के उपरी हिस्से से नाक तक गहरा घाव जैसा आकार बन जाता है। कुछ बच्चों में यह कटे हुए का निशान ऊपरी होठ तक आ जाता है और उनके कटे हुए होठ दिखाई देते हैं। इस विकृति से बच्चे को बोलने और सुनने की समस्या भी होती है। बोलने पर आवाज नाक से आती है। साथ ही कटे होंठ व तालू की वजह से बच्चे को अपनी मां का दूध पीने, खाना खाने में भी दिक्कत होती है।

👉38 प्रकार की बीमारियों का समुचित इलाज:

इस कार्यक्रम के तहत बच्चों की 38 तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4डी (जिसमें जन्‍म के समय किसी प्रकार के विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता सहित विकास में रूकावट की जांच शामिल है)का नाम दिया गया है। इनमें दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, सूनापन, गूंगापन, चर्म रोग, नाक रोग, त्वचा की बीमारी, मध्यकर्णशोथ, आमवाती हृदयरोग, प्रतिक्रियाशील हवा से होने वाली बीमारियां, ऐंठन विकार, न्यूरल ट्यूब की खराबी, डाउनसिड्रोम, फटा होठ एवं तालू-सि़र्फ फटा तालू, मुद्गरपाद (अंदर की ओर मुड़ी हुई पैर की अंगुलियां), असामान्य आकार का कुल्हा, जन्मजात मोतियाबिद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदयरोग, असामयिक दृष्टिपटल विकार आदि शामिल है।

👉गरीब परिवारों को मिलती है मदद:

डॉ. सुजीत कुमार कौशिक ने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की जन्मजात बीमारी की टीमों के माध्यम से स्क्रीनिंग करने के साथ ही उनका उनका उच्च चिकित्सा संस्थान में निशुल्क ऑपरेशन करवाया जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से उन परिवारों को लाभ मिल रहा है, जो अधिक राशि खर्च कर अपने बच्चे का ऑपरेशन नहीं करवा सकते हैं।