
संजय विजित्वर (विजित्वर)-
- विश्व संगीत दिवस पर कलाकारों ने सजायी ऑनलाइन संगीत की महफिल।
हाजीपुर(वैशाली)।सच ही माना गया है कि संगीत रुग्न शरीर को निरोग बना देता है।उदासीन और सुप्त मन को हर्षित कर देता है।आशा और कल्पना के सागर में डुबकी लगवा देता है। नकारात्मक भाव को सकारात्मक कर देता है ।इसके अनुगूंज से सम्पूर्ण वातावरण आनंदमय हो जाता है। अर्थात् संगीत दवा है,प्रेम है,प्रेरणा है,खुशी है,आत्मबल है,जीत है।
किसी मानव को संगीत से प्रेम नहीं हो ,ऐसा कम ही देखा गया है। जी हां,जब भी हम बेहद खुश होते हैं तो कोई गीत गुनगुनाते हैं या कोई साज बजाते हैं। चाहे लाख उदासी हो ,मन बोझिल हो ऐसे में संगीत मलहम का काम करता है।
विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रविवार की शाम स्थानीय कलाकारों ने ऑनलाइन संगीत की महफिल सजाई और एक से बढ़कर एक गीत -ग़ज़ल की प्रस्तुति से आत्मविभोर कर दिया।इस क्रम में सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक प्रेमचंद्र लाल और उनकी टीम ने गीत -गजल की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। इस अवसर पर गायक प्रेमचंद ने बताया कि कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन की मनाही है और यह जरूरी भी है। इसके कारण श्रोताओं के लिए ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम की व्यवस्था यहां के कलाकारों ने की है । लोग इस कार्यक्रम का आनंद फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप, इंटरनेट आदि पर भी उठा सकते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मीरा की रचना —श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया से किया गया। इसके बाद एक से बढ़कर एक गीत गजल की श्रृंखला बनती गई। प्रेमचंद ने जगजीत सिंह की गजल, मेहंदी हसन की गजल , बेगम अख्तर की गजल की प्रस्तुति की। अंत में कार्यक्रम का इनके साथ तबले पर वैशाली जिला के वरिष्ठ तबला वादक नवल किशोर लाल और नाल पर मनोज कुमार सुमन एवं सितार पर डॉ रोहित झा ने संगत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।
विश्व संगीत दिवस के अवसर पर कलाकारों ने अपनी- अपनी बात रखी। प्रसिद्ध रंगकर्मी क्षितिज प्रकाश ने कहा कि वैशाली की लोक -संस्कृति विश्व को प्रभावित करती रही है ,लेकिन वैशाली में ही इसके लिए समुचित प्रयास नहीं किया जा रहा है। संगीत गुरु हरीशंकर वर्मा ने कहा कि लॉकडाउन ने हमें रचनात्मकता बढ़ाने का अवसर प्रदान किया है। संगीत आदर्श भावना की अभिव्यक्ति का माध्यम है जो मन की गहराइयों को स्पर्श करता है। जीविकोपार्जन करने वाले लोक कलाकारों को सरकारी स्तर पर मदद मिलनी चाहिए। संगीत शिक्षक मुकेश शर्मा ने बताया कि विश्व संगीत दिवस का शुभारंभ 1982 में फ्रांस में हुआ था। यह दिन सिर्फ -और -सिर्फ संगीत के लिए समर्पित है। संगीत निर्देशक रामजन्म राजन ने कहा कि बिना संगीत के मानव पत्थर समान है संगीत मानव सभ्यताओं को प्रफुल्लित और जीवंत रखता है। निसंदेह संगीत को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक प्रयास किया जाना चाहिए।




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