✍…..परवेज अख्तर (सिवान)

महाराजगंज प्रखंड के देवरिया पंचायत स्थित महुआरी गांव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से रविवार को स्वामी विवेकानंद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस दौरान सैकड़ो लोगों ने उनके तेल चित्र पर बारी-बारी से पुष्पांजलि अर्पित किया। कार्यक्रम को संबोधन करते हुए विद्यार्थी परिषद के नगर इकाई मंत्री अमरजीत पांडे ने कहा कि
स्वामी विवेकानंद का पूर्व-मठवासी नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। वह योगियों के स्वभाव के साथ पैदा हुए थे और बहुत कम उम्र में ध्यान करते थे। उनका जन्म एक आर्थिक रूप से संपन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त एक वकील थे जिन्होंने अपने करियर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। स्वामी विवेकानंद का जन्म स्थान कोलकाता और उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के पिता की मृत्यु युवा होने पर अचानक हुई। इससे उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट गई और पूरे परिवार को गरीबी में धकेल दिया गया। स्वामी विवेकानंद घर-घर जाकर नौकरी मांगते थे। जब वह नौकरी पाने में असफल रहा, तो वह धीरे-धीरे नास्तिक में बदल गया और खुले तौर पर कहेगा कि भगवान जैसी कोई चीज नहीं थी। स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवनकाल में बहुत से बेहतरीन कोट्स बोले जो लोगों के लिए बेहद प्रेरणादायी है.मौके पर विकास कुमार,राजा चौबे,धन्नू उपाध्याय,मनीष पासवान,प्रिंस पासवान,मिथुन साह, मनोज प्रसाद,सोनू शर्मा,संजय गुप्ता,भरत साह,अखलेश तिवारी,सिद्धार्थ सिंह राजपूत,प्रदेश कार्यकार्णी सदस्य प्रदीप कुमार,अभिषेक पाठक,निरज कुमार,पंकज कुमार विद्यार्थी,पूर्व पैक्स अध्यक्ष अनिल सिंह,गौरीशंकर महतो,उपाध्याय, रहे।
जीरादेई ।प्रखण्ड क्षेत्र के तीतिरा गांव में रविवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्र सृजन अभियान के कार्यालय में मनाई गई । अभियान के राष्ट्रीय सचिव ललितेश्वर राय ने कहा कि युवाओं के आइकॉन है विवेकानन्द ।उन्होंने कहा कि स्वामी जी का सम्पूर्ण जीवन आदर्शो व नैतिक मूल्यों का खजाना है जो जितना लूटना है लूट सके ।अभियान के महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष आरती सिंह ने कहा कि स्वामी का सम्पूर्ण जीवन भारतीय आदर्शो व संस्कृतियों को विश्व के मानसपटल पर लाने में बिता उनके स्वर्णिम योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है ।इस मौके पर अभियान के बिहार मीडिया प्रभारी आशीष मिश्रा ,जिला अध्यक्ष अशोक राय , चितरंजन राय आदि उपस्थित थे ।
आर.के. मिशन में उनके तैल चित्रों पर शिक्षक व छात्र- छत्राओं ने श्रद्धा विनत हो पुष्प अर्पित किया गया।बाद में परिचर्चा आयोजित की गई