योगियों ,मुनियों और ज्ञानियों की भूमि भारत इस आधुनिकता के चक्कर में कब शराबियों की भूमि बन गया ,पता ही नहीं चला…?

✍नवीन सिंह परमार

♨वैश्विक महामारी कोरोना को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए लाॅकडाउन के दूसरे चरण के पूरे होने के बाद सरकार के द्वारा कुछ छूट दी गई, उसके बाद देश के राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में सोमवार से शराब की दुकाने खोल दी गई ।
मीडिया के विभिन्न माध्यम से कल दिखाए गए तस्वीरों को देखने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि शराब को लेकर जिस प्रकार की उत्सुकता देखने को मिल रही है । यह वास्तव में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ।
हम भारतीय दूनिया में अपनी संस्कार व संस्कृति के लिए जाने जाते है । लेकिन कल मदिरालय पर उमड़ी भीड़ से मेरा सारा भ्रम टूट गया । इस संकट की घड़ी में जिस तरह लोगों ने शराब के लिए दुकानों पर हाय तौबा मचाई वह देखकर मैं हैरत में था। क्या यह वही भारत है जो दुनिया को ज्ञान की पाठ पढ़ाने की बात करता है ?क्या ऐसा ही ज्ञान दुनिया को देने की जरूरत है ? यदि अपना आधुनिक भारत ऐसा है तो पूरा विश्व इस ज्ञान से वंचित रहे मेरा ऐसा व्यक्तिगत रुप से मानना है।
इस आधुनिकता से अच्छा तो हमारा पुरातन भारत ही ठीक था ।

योगियों ,मुनियों और ज्ञानियों की भूमि भारत इस आधुनिकता के चक्कर में कब शराबियों की भूमि बन गया ,पता ही नहीं चला ? शराब पीना बुरी बात नहीं है उसे पीने, लेने और खरीदने में भी एक संस्कार दिखना चाहिए। कल की तस्वीरें देख कर पूरी दुनिया भारत के संबंध में क्या सोच रही होगी ? आप खुद सोचिए ?
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[✍लेखक परमार मीडिया नेटवर्क : सीवान के संचालक व शंखनाद सेन्टर फाॅर स्टडी, रिसर्च एंड डायलॉग, सीवान के निदेशक मंडल के सदस्य हैं ।]