छपरा। रिविलगंज नगर के वार्ड नं. 12 के दलित बस्ती में भाजपा के सामाजिक समरसता पखवाड़ा के अन्तर्गत अम्बेडकर जयंती मनाया गया. इस अवसर पर भाजपा नेता और किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सेंगर ने कहा कि भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर का भारतीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान रहा है। वह भारतीय संस्कृति के अनन्य भक्त, मूल चिन्तक, विचारक तथा लेखक थे। अस्पृश्यता एवं जन्माधारित विशेषाधिकारों पर चल रही समाज व्यवस्था के वे कट्टर विरोधी थे। उन्होंने हिन्दू समाज रचना के विविध पहलुओं का गंभीर चिन्तन करने के साथ भारत में मुस्लिम राजनीति का भी विस्तृत अध्ययन किया था.उन्होंने इस्लाम तथा मुस्लिम राजनीति के सन्दर्भ में अपने विचार “पाकिस्तान एंड द पार्टीशन आफ इंडिया” में विस्तार से प्रकट किए हैं. डा. अम्बेडकर ने भारत पर मुसलमानों के क्रूर तथा रक्तरंजित आक्रमणों का गहराई से अध्ययन किया था. उन्होंने मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मोहम्मद गोरी, बाबर, नादिरशाह तथा अहमद शाह अब्दाली के अत्याचारों का भी वर्णन किया. श्री सेंगर ने कहा कि अम्बेडकर ने उन चाटुकारों तथा दिशाभ्रमित वामपंथी इतिहासकारों को फटकारते हुए लिखा है कि यह कहना गलत है कि ये सभी आक्रमणकारी केवल लूट या विजय के उद्देश्य से आए थे.उनके अनुसार इस्लाम का भ्रातृत्व सिद्धांत मानव जाति का भ्रातृत्व नहीं है. यह मुसलमानों तक सीमित भाईचारा है। समुदाय के बाहर वालों के लिए उनके पास शत्रुता व तिरस्कार के सिवाय कुछ भी नहीं है. डॉ. अम्बेडकर ने लिखा है कि इस्लाम एक सच्चे मुसलमान को कभी भी भारत की अपनी मातृभूमि मानने की स्वीकृति नहीं देता है.मुसलमानों की भारत को दारुल इस्लाम बनाने के महत्ती आकांक्षा रही है. अंबेडकर ने इस्लाम और इसाईयत को विदेशी मजहब माना है. श्री सेंगर ने कहा कि अम्बेडकर धर्म के बिना जीवन का अस्तित्व नही मानते थे, लेकिन धर्म भी उनको भारतीय संस्कृति के अनुरूप मान्य था,अनेक प्रलोभनों को छोड़कर उनका बौद्ध धर्म स्वीकार करना इसे सिद्ध भी करता है. डा. अम्बेडकर ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि इस्लाम में राष्ट्रवाद का कोई चिंतन नहीं है. इस्लाम में राष्ट्रवाद की अवधारणा ही नहीं है. वह राष्ट्रवाद को तोड़ने वाला मजहब है. डा. अम्बेडकर ने भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगों को “गृह-युद्ध” माना है. उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए किए गए प्रयासों की भी आलोचना की तथा इसे महानतम भ्रम बताया.
डा.अम्बेडकर एक अत्यंत प्रखर देशभक्त और प्रबल राष्ट्रवादी थे. अपनी जिंदगी के आखिरी पल तक इंसान-इंसान के मध्य भाईचारे का सूत्रपात करने और समानता की लहर प्रवाहित करने में वे जुटे रहे. राष्ट्रवाद की उनकी अवधारणा में किसी तरह की संकीर्णता के लिए कदाचित कोई स्थान नहीं था. डा.अम्बेडकर का मानना था कि काँग्रेस के सांप्रदायिक तुष्टीकरण की नीति के कारण देश को बहुत नुकसान हुआ. उनके अनुसार देश का साम्प्रदायिक आधार पर घटित हुआ विभाजन इसी तुष्टीकरण का परिणाम था. विभाजन के बाद वे भारत- पाकिस्तान के सम्पूर्ण जनसंख्या के अदला- बदली के हिमायती थे, यानि सारे हिन्दुओं को भारत आ जाना चाहिए तथा सारे मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए. कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता जोगिन्द्र सिंह, जिला परिषद सदस्य गुड्डू साह, मंडल अध्यक्ष रवि भूषण मिश्रा, स्थानीय नेता धर्मेन्द्र सिंह, राकेश सिंह, संजय तिवारी वारसी, कुंदन सोनी, सुधीर सिंह, जीतेश कुमार तथा ममता तिवारी आदि उपस्थित थे.
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