बैंककर्मी की मिलीभगत से नही किया जा सकता इंकार
रविकांत कुमार दैनिक खोज खबर मधेपुरा
मधेपुरा जिले की सम्भवत पहली और चौकानेवाली घटना है जिसमे निकासी फॉर्म पर खाताधारक के फर्जी दस्तखत कर रुपये की अवैध निकासी हुई है।
जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर भारतीय स्टेट बैंक शाखा में हुई फर्जी निकासी का मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी अनुसार रामपुर स्टेट बैंक शाखा के खाता धारक दिलीप यादव पिता चंदेश्वरी यादव ग्राम खुशरूपट्टी मैलवाड़ा टोला , थाना मुरलीगंज, जिला मधेपुरा निवासी ने बैंक शाखा पर आरोप लगाया है , कि उनके खाता संख्या *********8532 से विभिन्न तारीखों को फर्जी तरीके से रुपये की निकासी की गई है। इस फर्जी निकासी के समंध में खाता धारक दिलीप यादव ने बताया कि मेरे खाते से 16 जनवरी 17 को 22 हजार, 2 मार्च 17 को 24 हजार और 4 मार्च 17 को 24 हजार कुल 68 हजार रुपये की फर्जी निकासी की गई है।
उन्होंने आगे बताया कि जब हमने अपना पासबुक उपडेट करवाया तो मैं हैरान हो गया कि कैसे मेरे बिना अनुमति के रुपया खाते से निकासी हुई। इस फर्जी निकासी की शिकायत की लिखित आवेदन दे कर न्याय की गुहार भी लगाई। शाखा प्रबन्धक के द्वारा आस्वासन भी दिया गया कि कुछ दिन समय लगेगा , जांच कर अवश्य न्याय मिलेगा आप निश्चित रहे। कई दिनों के बाद जब पुनः मैं बैंक शाखा पहुंचा तो न्याय के बदले मुझे ही फटकार लगा कर मेरे ऊपर ही फर्जीवाड़े का आरोप लगाने लगे ।
बेचारा पीड़ित दिलीप यादव को जब कही न्याय नही मिला तो थक हार कर मीडिया से न्याय की गुहार लगाते हुये आप बीती सुनाई तो इस खबर के फर्जी निकासी के सत्य तथ्य की खोज में मीडियाकर्मी की टीम रामपुर भारतीय स्टेट बैंक शाखा पहुँच कर शाखा प्रबंधक राधा कृष्ण राम से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि ऐसा नही हो सकता उनके खाते से स्व निकासी की गई है आप चाहे तो निकासी फ्रॉम देख सकते है । उन्होंने निकासी फ्रॉम दिखाया जिसमे साफ साफ फर्जी दस्तखत किया पाया गया । इस फर्जीवाड़े को देख शाखा प्रबंधक के भी पसीने छूटने लगे , उन्होंने कहा कि निकासी तो सही में फर्जी लगता है क्योंकि तीनो दस्तखत अलग अलग है इसमें कैश काउंटर के कर्मचारी की गलती है , इस मामले की बारीकी से जांच करने पर सच्चाई सामने आएगी।
बैंक की विश्वसनीयता पर लगा प्रश्नचिन्ह-
गौरतलब हो कि लोग दिन रात के मेहनत से पाई पाई जोड़कर जमा किये गए रुपये की सुरक्षा के लिए बैंकों में अपनी धनराशि जमा करते है। और विश्वस्त रहते है कि उनका रुपया सुरक्षित रखा है। लेकिन जब बैंक की लापडवाही के कारण फर्जी दस्तखत कर रुपये की निकासी हो जाती है और गरीब खाताधारक को न्याय नही मिलता है तब बैंकों के ग्राहक के प्रति विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगता है। खैर जो भी हो मामला काफी संवेदनशील है और पीड़ित के बयान और पाये गए साक्ष्य से प्रतीत होता है कि बैंक में दिलीप के खाते से रुपये की फर्जी निकासी हुई है। अब देखना है कि क्या इस मामले की गहन जांच हो पाती है और पीड़ित खाताधारक को उचित न्याय मिल पाती है और इस फर्जी निकासी में संलिप्त लोगो पर कार्यवाही हो पाती है या नही।




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