दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट :-
मदर्स डे पर माँ के महत्व के बारे मे लोगों को बताए । मां वो अहसास है, जिसे शायद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। मां वो है जो आपके कुछ कहने से पहले ही सब जान जाती है। मां, जो निस्वार्थ भाव से दिन-रात, सुबह-शाम, धूप-छांव, सर्दी-गर्मी या बरसात की परवाह किये बिना हर दम हर वक्त आपके साथ होती है। और आज के दिन मां के सम्मान में पूरी दुनिया मदर्स डे मनाया जाता है
वैसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग डेट को मदर्स मनाया जाता है। लेकिन भारत में हर साल मई के महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में मनाते है। वहीं, दुनियाभार के कुल 46 देशों में आज ही के दिन मां के सम्मान में ‘मदर्स डे’ मनाते हैं।
कैसे शुरू हुई मदर्स डे की शुरुआत
साल 1908 में अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जार्विस ने मदर्स डे की शुरुआत की थी। अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया में पहली बार मदर्स डे मनाया गया था। एना ने ना कभी शादी की और न उनका कोई बच्चा था। अपनी मां की मौत के बाद एना ने मां के प्रति प्यार जताने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी, जिसके बाद धीरे-धीरे ये कई देशों में मनाया जाने लगा।आज के युवा माँ के ममता और उसके प्यार को भुलाते जा रहे हैं।उनको यह भी एहसास नही कि माँ के वजह से ही इस दनिया मे पैदा हुए हैं । माँ के कदमों के नीचे ही जन्नत ( स्वर्ग ) है ।माँ बडे ही लाड प्यार पालती है और पढा लिखाकर अपने पैरों पर खडा होने के लायक बनाती है । सर पे सेहरा सजाती है बहु को घर लाकर बेटे के जीवन को खुशि से भर देती है मगर बेटा पत्नी के लिए माँ को ही भुल जाता है।इस लिए आज के युवा पिढी पूरुष हो नारी सबसे अपील करता हुँ कि माँ के प्यार का एहसान तो अदा नही कर सकते हैं मगर उसके साथ प्यार से रहे । ये पैगाम आज के युवा पीढी के नाम । माँ का सम्मान करोगे तो जहां मे सम्मान मिलेगा , उनके सेवा से खुश होकर भगवान मिलेगा ।