बेटियों को न्याय दिलाने के लिये खटखटाया सीएम का दरवाजा
#परवेज अख्तर/सिवान : उच्च शिक्षा के लिये एक बेटी को ऋण नहीं मिलने व दूसरी की ऋण किस्त रोके जाने से हैरान-परेशान पिता की अब सारी उम्मीदें मुख्यमंत्री पर टिकी है। बेटियों के सुखद भविष्य के लिये तमाम जद्दोजहद उठा रहे पिता ने न्याय नहीं मिलने तक हार नहीं मानने की कसम ले रखी है। यह पूरा मामला शहर के शास्त्री नगर के रहने वाले दवा व्यवसायी संजय कुमार श्रीवास्तव की बेटी सुरुचि कात्यायिनी व निष्ठा कात्यायिनी से जुड़ा है। इस संबंध में पिता संजय ने बताया कि पहली बार मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र डीएम के माध्यम से जिला लोक शिकायत निवारण विभाग को मिला। जांच के क्रम में डीआरसीसी प्रबंधक दोषी पाये गये हैं। उनके खिलाफ 26 जुलाई को आदेश पारित होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी बार 24 अगस्त को सीएम का दरवाजा खटखटाते हुए पत्र भेजा तो उन्होंने शिक्षा सचिव को कार्रवाई करने के लिए प्रेषित कर दिया गया। शिक्षा सचिव को मुख्यमंत्री ने आवेदन की प्रति सीसी करते हुये मुझे भी टैग किया है। आर्थिक तंगी से बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने में रुकावटें खड़ी हो गई हैं। पूरा परिवार तनाव में है। कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत शिक्षा ऋण स्वीकृत होने के बावजूद सुरुचि कात्यायिनी को मिलने वाली राशि जगह बदलने के कारण डीआरसीसी ने रोक दी। सुरुचि हैदराबाद में एयरक्राफ्ट मेनेंटेनेंस की छात्रा थी। खान-पान व भाषा में समस्या होने की वजह से कोलकाता में उसका एडमिशन एक अन्य कॉलेज में हुआ है। बॉयो-टेक बीएस.सी में नामांकन के लिये निष्ठा कात्यायिनी के आवेदन को डीआरसीसी ने रिश्वत नहीं देने पर गलत तरीके से अस्वीकृत कर दिया। इस मामले में डीआरसीसी प्रबंधक पर पांच हजार रुपये कार्य कराने के लिये मांगने का आरोप लगाया है। इसे लेकर डीआरसीसी प्रबंधक से शो-कॉज किया गया है कि क्यों नहीं अनुशासनिक कार्रवाई की जाये। नियम के परे जाकर डीआरसीसी प्रबंधक पर आवेदन को डिक्नलाईन करने का मामला है।




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