
दिघवारा से आमी तक सर्वेश्वरी के प्राकट्य व चमत्कृत है, कण कण
*अम्बिका स्थान के प्रवेश द्वार दीर्घद्वार रक्षक हैं गुप्तेश्वर महादेव*
दक्ष सेना बनाम रूद्र सेना संघर्ष में भैरव गणों का संचालन कर्ता आदि भैरव का गुप्तवास है,गुप्तेश्वर स्थान चकनूर।
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✍परमार अखिलेश
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‘साकारं च निराकारं नेति नेतीतः सर्वदा,
भेदाभेद विनर्मुक्तो वर्तते केवलः शिवः।आदि अवधुतेश्वर भगवान दत्तात्रेय के उक्त श्लोक के अनुसार सगुण व निर्गुण भेदबुद्धि से परे सदाशिव का रूद्र रूप तब प्रकट होता है,जब जीव में श्रद्धा व विश्वास के आत्मिक एवं आस्तिक भाव तिरोहित हो जाते हैं । दक्ष सहित सेना का पराभव सती दहनोपरान्त शव के साथ शिव का तांडव फिर विग्रह शक्ति श्री हरि विष्णु द्वारा सृष्टि रक्षार्थ सती शव को सुदर्शन चक्र से खंडन इसी भाव को दर्शाता है। लोक आस्था के मुताबिक सुदर्शन चक्र से चमत्कृत स्थल ही चकनूर है ।जहाँ से शिव अपनी रूद्र सेना का संचालन कर रहे थे और जहाँ गुप्त वास कर रहे थे वही स्थान गुप्तेश्वर स्थान है । बहरहाल, सारण जनपद के शिव-शक्ति उपासना व आस्था का तीर्थ है चकनूर गुप्तेश्वर महादेव धाम ।

शंकर -भवानी व वैष्णवी शक्ति से चमत्कृत है अम्बिका स्थान व चकनूरः- हरि और हर विष्णु और शिव का समन्वय स्थल हरिहर नाथ सोनपुर है तो अम्बिका स्थान का प्रवेश द्वार दीर्घद्वार(दिघवारा)का चकनूर शंकर-भवानी एवं वैष्णवी शक्ति प्राकट्य व चमत्कृत भूमि है।
भाषावैज्ञानिक मत से पुष्टि:-आचार्य डॉक्टर उपेन्द्र भूषण मिश्र, आचार्य स्वर्गीय सत्यदेव त्रिपाठी,डॉक्टर राजेश्वर सिंह राजेश कुमार रौशन प्रभृति विद्वानों के आनुसार ‘चकनूर’शब्द चक्रसूर्य का विकृत रूप है। चक्रसूर्य का तद्भव चकसूर ही कालांतर में चकनूर प्रचलित हो गया ।
शास्त्रीय प्रमाण:-यद्यपि स्पष्ट शास्त्रीय प्रमाण नहीं मिलता ।मगर भाषा विज्ञानी गंगा गंडक व सोन के तटवर्ती क्षेत्र को ‘कनखल’करार देकर पंडित नेहरू कृत’भारत की खोज’में वर्णित कनखल हरिद्वार का खंडन कर देते हैं । भाषा विद् डॉक्टर राजेश के अनुसार कल कल व खल खल ध्वनियों में कल कल गंगा की तरंगों ध्वनि है और खल खल नारायणी(गंडक) व स्वर्णरेखा( सोन)की ध्वनि है। बहरहाल, आमी दिघवारा ही नहीं पूरा सारण अरण्यक भूमि ही कनखल है ।
पुरातत्व प्रमाण:-पूर्व मध्य रेलवे के दिघवारा व अंबिका महारानी हाॅल्ट के बीच एनएच 19से सटा चकनूर गाँव स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर मीरपुर भुआल की सीमा पर है। पीछे पुराना थाना दक्षिण पूर्व डोमनशाह सैयद का मजार साम्प्रदायिक एकता को एक सूत्र में पिरोए हुए है। रेल पुल झझियाडगर निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। खुदाई के दौरान प्राप्त स्वर्ण मुद्राएँ अंग्रेज ले गए । दीघी तालाब से आमी तक का सुरंग बंद करा दिया लोगों ने। हाँ दीघी से कुछ हट कर पूर्व उत्तर दिघवारा-भेल्दी रोड के बगल में ईट भट्ठा के लिए हुए खुदाई में एक देवी की मूर्ति वैष्णव अन्य मूर्ति यां मिली थी। देवी मूर्ति दिघवारा में स्थापित हैं नकटी देवी मंदिर में है। बहरहाल, शिव-सती विवाह के शिव अगवानी का अपभ्रंश सिआनी,मटिहान श्री नगर गंगा जल भैरोपुर मानपुर साक्षी हैं तो चकनूर मानूपुर कीरतपुर ईशुपुर मथुरापुर सुरआगण हराजी बोधा छपरा गोराईंपुर सती दहन व दक्ष अभिमान भंग का।




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