जब पुरा सीवान चुनाव में व्यस्त है, उसी वक्त दूसरी ओर पंजवार अपने बेटियों के प्रोत्साहन के लिए राज्यस्तरीय हाॅकी टूर्नामेंट आयोजित कर रहा है

✍ निराला

आज पंजवार रहना था। सीवान जिला के रघुनाथपुर प्रखंड वाला पंजवार। मेरे हिसाब से बिहार का इकलौता मॉडल गांव। इस मायने में मॉडल नही कि यहां संरचनात्मक निर्माण हो गया है, सड़कें अच्छी हैं, सब पक्का है, शहर जैसा हो गया है। ना-ना, बिल्कुल नही। हार्डकोर गांव है और विकास के निर्माणात्मक पैमाने पर बिहार के एक सामान्य गांव की तरह या उससे भी नीचे। यह गांव है मॉडल हैं अपनी सामूहिकता,सरोकार,सामुदियकता,प्रगतिशीलता की वजह से। लगन, जिद,जुनून,समर्पण की वजह से। इस गांव में क्या क्या होता है,यह क्यों खास है यह बताएं तो बहुत लंबा हो जाएगा। यहां नाटक होता है, यहां 5 स्कूल है, कालेज है, संगीत महाविद्यालय है, यहां साल में एक बार जिले का ही नही राज्य के स्तर पर पिछले 25 सालों से सबसे बड़ी प्रतियोगिता होती है, यहां साल भर में चार पांच बार अलग अलग खेलों का टूर्नामेंट होता है, यहां हर साल भोजपुरी सम्मेलन होता है। बहुत बात है बताने को। यहां का एक सामान्य मजदूर भी साल में हजार रुपया चंदा दे देता है अपने गांव में ऐसे आयोजन के लिए।
अभी फिलहाल यह बताना है कि जब पूरा देश,पूरा बिहार चुनाव में मगन है, पूरा सीवान कविता सिंह बनाम फलाना में व्यस्त है तो पंजवार में दूसरी धुन है। यहां राज्य भर से लड़कियां पहुँची हैं। हॉकी का ट्रेनिंग चल रहा है। इसी साल मैरी कॉम स्पोर्ट्स क्लब बना है,उसी के सौजन्य से। ये अंडर 16 की लड़कियां हैं। यहां 8 दिन खेलेंगी। फिर इनमें से 40 लड़कियों को निकालकर यह गांव बिहार को दे देगा कि इन्हें नेशनल खेलवाईये। इन लड़कियों का ध्यान रखने,समय पर खाना पानी का इंतज़ाम करने में पूरा गांव लगा हुआ है। यह सब क्यों होता है? क्योंकि यहां गांव में घनश्याम शुक्ल मास्साब रहते हैं। यहां Sanjay Singh भाई रहते हैं। पूरे गांव को बांधकर रखते हैं। इनके लिए अपना गांव ही एक देश है, एक पूरी दुनिया हैं।
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[ लेखक हिन्दी पट्टी के जाने-माने पत्रकार व सामाजिक सरोकार से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ हैं ]
✍परमार मीडिया सीवान