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चम्पारण सत्याग्रह  या मोतिहारी के किसानों का मजाक ?

दैनिक खोज ख़बर के लिए विवेक शंकर 09473496292 मोतिहारी बिहार: आजकल पूरे चम्पारण में चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह मनाने कि धूम मची हैं, बहूत दूर-दूर से गांधीवादी मोतिहारी आ रहे है पूरे शहर को समारोह के लिए सजाया जा चूका है, हर तरफ गाँघी जी के आदर्शो एवम् सत्याग्रह पर चर्चा हो रही है,जब पूरा शहर जश्न में डूबा है उसी समय चम्पारण के बहूत से लोग इस द्वंद में फसें हैं कि आखिर हम क्यूँ ये समारोह मना रहे हैं।

जैसे कि हमलोग जानते है कि चम्पारण सत्याग्रह किसानों की दीन दुखी हालात को देखते हुये आरम्भ हुआ।तीनकठिया प्रणाली के खिलाफ एक अभियान चला और चम्पारण सत्याग्रह के रूप में बदल गया, इस आंदोलन की सफलता को देख अंग्रेजी सरकार के पसीने छुट गये और इस आंदोलन के देश की आजादी का अहम आंदोलन मना गया।

पर इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि यह आंदोलन किसानों की हालात को देखते हुये किया गया था। पर जब देश के आजादी के बाद भी चम्पारण के किसानो के हालात जैसे के तैसे रह गये या फिर और खराब हो गये, तो हम कैसे समारोह मना सकते हैं, हम जहाँ कल थे वही आज भी है।

हम बड़ी ही माफ़ी के साथ कहना चाहते है कि या तो समारोह मना रहे है चम्पारण सत्याग्रह या फिर यहाँ के किसानों का मजाक उड़ाया जा रहा हैं। किसान के दर्द को सुनने वाला कोई नही।

किसान कल्याण की जिम्मेदारी जिसको मिली वो अपने और अपने लोगों का कल्याण करने में लगे हैं। ना तो कोई चम्पारण के बंद चीनी मिल को खुलवाने पर पहल कर रहा न ही कोई नहरों में पानी, क्रय केंद्र, उचित मूल्य पर खाद बीज आदि सुविधा उपलब्ध कराने पर पहल कर रहा। बस सब अपनी धुन मस्त हैं और किसान तिल-तिल मर रहे हैं।