•उसके पति ने कहा, सजावट की तरह रहो , कौन तुम्हें मदद करेगा ?यह पुरुषों की दुनियाँ हैं. सब के सब , कभी न कभी ऐसे रिश्ते बनाते हैं. अगर तुमने मेरी जिंदगी मॆं ज्यादा टाँग अडाई, तब सब से कह दूँगा – यह औरत पागल हैं.
•उसने नज़रें उठाई और कहा- सब के सब तुम्हारे जैसे नहीँ हैं. तुम्हारे ये तरीके और हथियार पुराने हो गये, मुझ पर काम नहीँ करते. हाँ , जो तुम जैसे हैं , वहीं तुम्हारा साथ देते हैं. मैं नारी हूँ, रानी हूँ, शक्ति हूँ। इसलिये शर्मिंदा होने का समय तुम्हारा हैं.
मेरा नहीँ. आज़ के आधुनिक समय में अभी भी कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं , जो नारी को समानता का दर्ज़ा देने में विश्वाश नही रखते.
Source: rekhasahayतरीके और हथियार ( कविता )




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