उझानी नगर पालिका परिषद की हठधर्मिता से दर्जनों किसान नरकीय जीवन जीने को मजबूर

व्यंग्यकार डाॅ. अनवर कमाल ( Edited by आज़ाद नेब )
बदायू 11 मई।लगभग 15 वर्ष पूर्व नगर पालिका उझानी द्वारा नगर के मुख्य नाले को सटे हुए गांव नरऊ के 45 बीघा क्षेत्र में फैले हुए तालाब से जोड़ा गया था। नगर की गन्दगी को अपने आँचल में समेटे हुए ये गन्दा पानी पिछले कई वर्षों से तालाब की हदों से बगावत करके गरीब किसानो की कृषि योग्य भूमि को अपनी हवस का शिकार बनाने पर उतारू हो गया।काफी शिकायतों के बाद भी नगर पालिका परिषद अपनी ज़ेरे सरपरस्ती में परवरिश पाने वाले इस जहरीले दरिया को किसानो की कृषि योग्य जमीन पर नाजायज कब्जा जमाने से कभी भी नही रोक सकी। 
जरा सोचिये जब इस समय 40℃ तापमान की गर्मी पर पूरा क्षेत्र जलमग्न है तो बरसात के मौसम में इस आवारा जल की मग्नता का क्या आलम होता होगा। लगभग 600 बीघा से भी अधिक कृषि योग्य भूमि ने अपना वजूद खोकर दर्जनों किसानों को भूमिहीन किसानो की श्रेणी ला खड़ा किया है।मगर न0पा0प0 के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व वजूद में आयी नरऊ की ग्राम पंचायत की प्रथम प्रधान श्री मती शकुंतला देवी के अथक प्रयास भी किसानो के हित में न0पा0 के पत्थर दिल को ना पिघला सके।
नाले के पानी की सही निकासी और नाला निर्माण/मरम्मत के लिये लाखों ₹ आने के बाद भी न0पा0 प0 और जलनिगम की उपेक्षा ने इसे लाल फीता शाही की जंजीरों में जकड़ रखा है। मजबूर होकर किसानो को न0पा0प0 के विरुद्ध अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।
हमारी टीम जब इस गाँव में पहुंची तो ग्रामीणों में न्याय की उम्मीद जागी।सबसे पहले उन्होंने नदी का रूप धारण कर चुके  अपने खेतो के नजारे कराये उसके बाद बरसात के दिनों में इस दूषित जल की विकरालता से प्रभावित होने वाले क्षेत्र के दर्शन कराये।महिलाओं ने बताया कि थोड़ी थोड़ी जमीन के मालिक,अधिकतर किसान भूमिहीन हो चूके हैं।उनके सामने रोज़ी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा अबतक इस गाँव में सरकारी शौचालय नही बनवाये गए हैं।इसलिए खुले में शौच को जाना पड़ता है।जलभराव के कारण थोड़ी जगह बचती है जहां स्त्री-पुरुष और बच्चों को शौच को जाना पड़ता है।जिस कारण बहु-बेटियों को कभी कभी शर्म शार भी होना पड़ता है।
ग्राम पंचायत के इस गम्भीर विषय की जानकारी उच्चाधिकारियों को नही देना सचिव की घोर लापरवाही उजागर करती है।
मजबूर और असहाय किसानो के हित में जिला कृषि अधिकारी व् जिला समाज कल्याण विभाग कार्यलय द्वारा भी अभी तक कोई क़दम नही उठाया गया।
जलमग्न भूमि के दूषित और गन्दे जल ने अपना प्रभाव इंडिया मार्का नलों में भी दिखाना शुरू कर दिया है।ये नल भी अब न0पा0 की भाषा बोलने लगे हैं और दूषित जल उगल रहे हैं। बर्तन में भरा हुआ पानी 10 मिनट के अंदर पीला हो जाता है।जिसके प्रयोग से ग्रामीणों में विभिन्न रोगों के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।पीलिया,रतोंधी,उल्टी-दस्त.अन्य पेट रोग सहित बच्चों में अच्छा खान पान होने के बाद भी कुपोषण के लक्षण दिखना आदि।मगर सम्बंधित विभाग/प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पानी कीे गुणवत्ता की जाँच हेतु किसी प्रकार का कोई नमूना नही लिया गया है।और ना ही निरीक्षण के लिए कोई अधिकारी पहुंचा है।
स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह से बेखबर है मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को 1-1टीम का गठन कर ग्रामीणों और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करा के आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। गुणवत्ता की जाँच हेतु किसी प्रकार का कोई नमूना नही लिया गया है।और ना ही निरीक्षण के लिए कोई अधिकारी पहुंचा है।
स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह से बेखबर है मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को 1-1टीम का गठन कर ग्रामीणों और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करा के आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
समय रहते यदि जिला प्रशासन उक्त 45 बीघा में फैले तालाब का पक्का निर्माण करा देता न0पा0प0 नाले को प्रस्तावित करुआ पुल से जोड़ देती तो ये तालाब इतना विकराल रूप धारण कर ग्रामीणों की तवाही का कारण नही बनता और ना ही उनको अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता।