मांझागढ़ गोपालगंज ,आसमान को छूने वाली महंगाई से आम आदमीऔर किसान की स्थिति दयनीय होती जा रही है । 170 रुपया प्रति लीटर सरसो तेल बिक रहा है तो 50 रुपया किलो परवल और करैला प्रति दर्जन केला बिक रहा है तो नेनुआ के फूल 120 रुपया प्रति किलो बिक रहा है ।इस परिस्थिति में मजदूरी कर परिवार की परिवरिश करने वाले के थाली कभी सब्जी गायब हो जाता तो कभी दाल गायब हो जाता है एक तरफ कोरोना महामारी के चलते लोग बेरोजगार हो गए ।कारण यह है कि कोरोना के चलते कल कारखाने बन्द हो गए जिसके चलते लोगो को रोजगार नही मिल रहा है । बिहार में कल कारखाना नही रहने के कारण यहां लोगो को रोजगार नही मिल पाता है ।10 रोज काम करते है तो 20 दिन घर बैठ 10 दिन की कमाई से 20 दिन घर बैठे खाते है ।इतना ही नही किसानों के भी महंगाई ने कमर तोड़ दी एक एकड़ में खेती करने में किसानों को 27 हजार रुपया खर्च करना पड़ रहा है ।जिससे किसानों के आय दोगुना होने की आशा पर पानी फिर रहा है ।किसानों कहना है कि 150 रुपया कथा खेत की जुताई लग रहा है 150 रुपया कथा धान रोपनी की मजदूरी देना पड़ा है ।तो 250 रुपया घन्टा पम्प से पानी चलना पड़ रहा है । इसी प्रकार एक एकड़ में खेती लागत 27 हजार लग जा रहा है जब कि मौसम साथ दे दिया तो एक एकड़ में 12 से 15 क्यूंटल धान की उपज होता है जिसकी कीमत 15 हजार से बीस हजार होता है ।इस परिस्थिति में दो गुना आया कि आशा पर पानी फिर रहा है ।और मौसम साथ नही दिया तो खेती में लगाये गए रकम भी नही निकल पाता है ।कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की मार झेलनी पड़ रहा है ।इस परिस्थिति में किसान आसमान को छूने वाली महंगाई में सब्जी दाल के साथ किसानों को भोजन कहा नसीब होंने वाला है । आसमान को छूनेवाली महंगाई दाल सब्जी और मलाई का मजा वही ले रहे है जो सरकारी कर्मचारी और अधिकारी है । जिन्हें सरकार महंगाई भत्ता से लेकर सभी सुबिधा मुहैया करा रही है । दूसरी तरफ उन पर कोई महंगाई की अवसर नही है जो देश और राज्य को सम्भाले है ।अगर थोड़ा भी महंगाई के अवसर देश और राज्य चलाने वाले पर रहता तो वे महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए आवश्यक कदम उठाते परन्तु उन लोगो के द्वारा महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए आवश्यक कदम नही उठाये जाने के कारण राजनीति करने वाले लोग सड़क पर उतर कर धरना प्रदर्शन महंगाई के विरुद्ध करने के लिए विवश हो गए है ।