सिंगापुर, 14 सितंबर: विश्व साहित्य सेवा संस्थान (VSSS) सिंगापुर और भारतीय उच्चायोग के संयुक्त तत्वावधान में हार्बरफ्रंट टावर-2 में हिंदी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह में हिंदी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण का अनूठा संगम देखने को मिला।

मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में भारतीय उच्चायोग के प्रतिनिधि अरविंद श्रीवास्तव और ज्योति ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इंडोनेशिया से आईं पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र की विश्व रिकॉर्ड धारक इंदु नांदल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में अरविंद श्रीवास्तव ने हिंदी के वैश्विक प्रसार पर जोर दिया, जबकि ज्योति के मधुर स्वर में प्रस्तुत ‘वंदे मातरम्’ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। VSSS-Singapore की अध्यक्ष अनुसूया साहू ने नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कला का जादू
समारोह का शुभारंभ ‘डिफाइन डांसर्स’ और ‘नट्यारंजिनी सेंटर फॉर डांस एक्सीलेंस’ की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कलाकारों ने भरतनाट्यम शैली में गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, ‘शिव तांडव’ और राधा-कृष्ण के मनमोहक नृत्यों से समां बांध दिया। इसके अलावा, किंडल किड्स इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने भगवान बुद्ध और अंगुलिमाल की कथा पर आधारित ‘हिंसा से अहिंसा की ओर’ नाटिका प्रस्तुत कर शांति और सद्भाव का संदेश दिया।

पुस्तक विमोचन और ज्ञानवर्धक सत्र

  • शैक्षिक व प्रेरणादायक चर्चा: डॉ. स्मिता सिंह ने देवनागरी लिपि के महत्व को समझाया, आलोक मिश्रा ने ‘सही राह’ पर विचार रखे और विशा सेठ ने योग व स्वस्थ जीवनशैली पर प्रकाश डाला।
  • पुस्तक विमोचन: संगीता सिंह की बालगीतों की पुस्तक और लेखिका प्रतिमा सिंह की पुस्तकों ‘मेरी कलम मेरा प्रेम’ व ‘Arithmetic of Love’ का लोकार्पण किया गया।
  • महिला सशक्तीकरण: ‘ग्लो सर्कल’ की महिला उद्यमियों ने बिजनेस वॉक के जरिए अपने व्यवसायों का परिचय दिया, जो आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बना।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई, भारत, लंदन और अमेरिका के अनेक हिंदी प्रेमियों ने ऑनलाइन वीडियो संदेशों के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं भेजीं। सिंगापुर के कवियों ने काव्यगोष्ठी में भाग लेकर माहौल को पूरी तरह साहित्यिक बना दिया। इस सफल आयोजन ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करते हुए सिंगापुर में हिंदी और भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान दी।